यूएस : टेक्सटाइल उद्योग को 6 बिलियन डालर का प्रोत्साहन वापस लेने का इच्छुक

जिनेवा। यूएस डेयरी प्रोडक्ट एवं चिकित्सा उपकरणों के भारतीय बाजार पर कब्जा करना चाहता है तथा जनरलाइज्ड सिस्टम आफ प्रिफरेंस (जीएसपी) स्कीम के तहत भारतीय टेक्सटाइल्स एवं लेदर उत्पादों के लिए लगभग 6 बिलियन डालर का फायदा बंद करने के लिए आधार तैयार कर रहा है।
एक व्यापार विश्लेषक ने कहा कि 1970 में वर्गीज कुरियन द्वारा शुरू किए गए `आपरेशन फ्लड' और `सफेद क्रांति' के फलस्वरूप भारत डेयरी उत्पादों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है, लेकिन अब वह अमेरिकन डेयरी उत्पादों के लिए टार्गेट है। यूएस ने भारत को हाई-एंड चिकित्सा उपकरण का निर्यात बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। इस तरह डेयरी एवं चिकित्सा उपकरण यूएस के लिए मुख्य प्राथमिकता है।
मध्य वर्ग की बढ़ती मांग के कारण भारतीय डेयरी बाजार के बड़े आकार को देखते हुए यूएस का मानना है कि भारत डेयरी क्षेत्र के लिए आकर्षक स्थल बन सकता है। औद्योगिक देशों द्वारा विकासशील एवं अल्प विकसित देशों को एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) आधार पर प्रिफरेंशियल टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत टेक्सटाइल्स, लेदर एवं अन्य उत्पादों का निर्यात करने की अनुमति दी गई है।
यूएस, यूरोपीयन, यूनियन (ईयू) एवं जापान आदि जैसे डोनर देश एमएफएन ढांचा समाप्त कर विभेदक ढांचा पेश करना चाहते है जिसमें वे निर्णय करेंगे कि किस देश को उनकी शर्त़ों पर जीएसपी का लाभ उपलब्ध होगा।

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