क्रूड आयल का भाव 100 डालर की ओर अग्रसर


इब्राहीम पटेल
मुंबई। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इस सप्ताह के प्रारंभ में मांग वृद्धि का विकासदर घटने की संभावना जताई थी। इसके बावजूद उपयोग में वृद्धि, इस दशक के प्रारंभ में थी उसकी तुलना में अधिक गति से बढ़ी है कि नहीं यह भी अब देखना होगा। अमेरिका ने इरान पर नए सिरे से व्यापार प्रतिबंध लागू करने की योजना के बाद पिछले छह सप्ताह से बढ़ रही कीमत, चार साल के बाद पहली बार 80 डॉलर को लांघ गई है। वेनेजुएला में चलते अविरत राजकीय विवादों और मजबूत होती वैश्विक इकोनामी के चलते क्रुद वपराश वृद्धि की संभावनाओं ने भी कीमत को ऊपर जाने का रास्ता खुला कर दिया है। पिछले लगातार चार सप्ताह से करेंसी बाजार का परिदृश्य भी नई हेडलाइनों बन रहा है। इस अवधि में अर्ज़ेंटीना पेसो 15 प्रतिशत और तुर्की लीरा 9 प्रतिशत लुढ़का। भारत, चीन साउथ कोरिया, ताईवान, फिलीपिंस, मलयेशिया, सिंगापुर जैसी एशियाई मुद्राएं 0.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत कमजोर हुई, उसके चलते क्रूड आयातक देशों की हालत अधिक नाजुक हो गई है।
कच्चे तेल ने तो करंट एकाउंट सरप्लस और डेफिसीट वाले देशों के साथ इमर्जिंग मार्केट के उत्पादक और आयातक ऐसे सभी देशों के सामने बढ़ रहे जोखिमों ने कोई भेदभाव रखा नहीं, इस घटना ने निवेशकों को चारो ओर से सावचेती बरतने के लिए मजबूर किया है। अमेरिकी गैस पंप पर कीमत तीन साल की ऊंचाई पर पहुंच गया है, ऐसी फ़रियाद के साथ डेमोक्रेट सेनेटरों ने भी प्रमुख डोनाल्ड ट्रम्प को यह मुद्दा ओपेक के साथ उठा लेने के लिए बिनती की है। इतना ही नहीं आवश्यक लगे तो यह मुद्दा ले कर अमेरिकी ऊर्जा प्रधान को 22 जून की वियेना ओपेक मिटिंग में भेजने का भी आग्रह किया था।
एनर्जी विश्लेषकों का कहना है कि ओपेक मिटिंग के सामने अमेरिका आवाज उठाएगा तो भी उसका कोई परिणाम नहीं आने वाला है। उनके लिए क्रूड की कीमत को दबाव में लाने का सबसे आसान उपाय अमेरिका ने दशकों से स्टोरेज करके रखे हुए इमरजेंसी आयल रिजर्व में से बिक्री करना है। आपूर्ति कमी के सामने सुरक्षा
हांसिल करने के लिए खड़ी की गई 6610 लाख बैरल की इस रिजर्व में से यदि माल हल्का किया जाए तब बाजार में खड़ी हुई आपूर्ति कमी तुरंत हल्का हो सकता है।
कीमत 100 डॉलर होने के लिए आगे बढ़ रही है, इसका आर्थिक असर क्या होगा इस विषय पर टिप्पणी करते हुए स्विस बैंक यूबीएस ने चेतावनी के स्वर में कहा था कि कच्चे तेल की कीमत ने वैश्विक विकास की गति को रोक दिया है, यदि इसी ही तरह कीमत बढ़ती रहेगी तब अमेरिका फिरसे मंदी में जा सकता है। वेनेजुएला और मध्यपूर्व में बढ़ रहे भू-राजकीय टेंशन, बड़े उत्पादक देशों की ओर से आपूर्ति कटौती का ड़र और मजबूत मांग ने कच्चे तेल के वायदा को तेजी का नया इंधन दिया है।

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