आम चुनाव का शंखनाद

कर्नाटक में जनतादल (एस) और कांग्रेस की सरकार द्वारा सत्ता संभालने के साथ कांग्रेस और अन्य अनेक क्षेत्रीय पार्टियों ने विपक्षी एकता प्रदर्शित कर भाजपा के समक्ष चुनौती पेश की है। लोकसभा के चुनाव में हर सीट पर भाजपा के सामने विपक्ष का एक उम्मीदवार खड़ा रखने की चर्चा शुरू हुई है। तभी दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की सरकार पांचवे वर्ष में प्रवेश कर रही है और प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तथा अन्य मंत्री और नेता देशभर की यात्रा कर जनता के समक्ष चार वर्ष के कामकाज का लेखाजोखा देने वाले है।
कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान आरोपबाजी ने सभी कीर्तिमान तोड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निशाने पर प्रधानमंत्री पद और नरेद्र मोदी है। देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है, भाजपा भ्रष्टाचारी है, युवावर्ग के रोजगार में कोई सुधार नहीं हुआ है - सरकार विफल गयी है, ऐसे आक्रामक प्रचार का जवाब प्रधानमंत्री देंगे। विशेष रूप से स्मार्ट शहरों का विकास, नमामि गंगे प्रोजेक्ट की प्रगति, रोजगार में वृद्धि, विदेशी निवेश, कालाधन के चलन पर नियंत्रणों का असर आदि का जोरदार ढंग से जवाब दिया जायेगा। इसके लिए विज्ञापनों के अलावा पोस्टरों, हैण्डविलों आदि द्वारा जनता से संपर्क किया जायेगा।
कांग्रेस पार्टी सरकार पर आक्रमण चालू रखने के लिए ``विश्वासघात' यात्रा आयोजित करती है। नीरव मोदी और मेहुल चौक्सी का नाम उछाला जायेगा। संभव है कि लोकसभा चुनाव से पहले भगोड़े भ्रष्टाचारियों के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों का ठोस परिणाम बताया जा सके। पाकिस्तान मोर्चे पर भी सरकार और सेना सक्रिय है। जवाबी कार्रवाई के लिये सेना को पूरा अधिकार दिया गया है। पवित्र रमजान महीने के लिए सेना द्वारा `युद्धविराम' घोषित किए जाने के बाद भी आतंकवादी हमला चालू रहा। अब आगामी महीनों में आतंकवादियों को `सबक' मिलने की धारणा है।
मोदी सरकार के सामने अभी तक भाव वृद्धि की शिकायत नहीं थी, लेकिन क्रूड तेल के भाव बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ने का मुद्दा राहुल गांधी को मिला है। देखना यह है कि अब उसका समाधान कैसा निकलता है। चार वर्ष में आर्थिक सुधार काफी हुआ है - यद्यपि अभी अधूरा है और उसका फल मिलने में समय लगता है और नकारात्मक बातों का प्रचार अधिक होता है।
गौरक्षा के नाम पर दलितों और मुसलमानों पर अत्याचार होने की खबरें आने के बाद प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने सार्वजनिक में दु:ख व्यक्त कर चेतावनी भी दी थी। इसके बाद `गौरक्षकों' की शिकायत नहीं आयी है, लेकिन दलित युवक सार्वजनिक में मूंछ मरोड़े - बांह चढ़ाये तो वह `गुनाह' बन जाए और मारपीट हो, वह स्वीकार नहीं है। कानून अपना काम करे लेकिन समाज में इस अन्याय की खबर आने पर सरकार बदनाम होती है। हाल में दिल्ली के आर्कविशप ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले अन्याय, अत्याचार का मुद्दा उठाकर 2019 में लोकसभा के चुनाव में `नई सरकार' चुनने का आह्वान किया है। राजनीति में धर्म की भूमिका पर आश्चर्य नहीं है, लेकिन मौजूदा संयोगों में - कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी विपक्षी नेताओं को एक मंच पर एकत्र कर रहे है। तब धार्मिक प्रमुख ऐसी अपील द्वारा राजनीतिक नेताओं का हांथ मजबूत करते है। नरेद्र मोदी के लिए यह भी एक चुनौती है।
कर्नाटक में सरकार कितनी टिकेगी? मुख्यमंत्री के शपथविधि से ही यह प्रश्न चर्चा में है। कांग्रेस के उपमुख्यमंत्री ने तो संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पांच वर्ष तक समर्थन चालू रखने के लिए कोई समझौता नहीं हुआ है। जनता दल (एस) के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी ने भी कहा कि एक वर्ष तक कांग्रेस कैसा सहयोग देती है उसे देखकर भविष्य निश्चित होगा, लेकिन बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने के बारे में कोई समझौता नहीं हुआ। चुनाव से पहले कुमार स्वामी ने तो सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस का विश्वास नहीं किया जा सकता... यह पृष्ठभूमि होने से सरकार के भावी की चर्चा हो रही है। संभावना ऐसी है कि लोकसभा के चुनाव तक तो कांग्रेस समर्थन देगी और टिकट वितरण में लाभ उठाने का प्रयास करेगी - तब क्या होगा?
कर्नाटक में हुए `सरकारी - समझौता के आधार पर विपक्षी एकता मंच - एलायंस हो तो भी वह टिक सकेगा? आधार ही यदि कमजोर - अविश्वास का हो तो इमारत की गारंटी किसे होगी?

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