पोलिएस्टर के धागों में तेजी चरम पर

पोलिएस्टर के धागों में तेजी चरम पर

हमारे संवाददाता
सूत बाजारों में तेजी के चलते ही तैयार मालों में कामकाज कम हो रहे है। पोलिएस्टर के धागों में तेजी काफी चरमपर है। गर्मी का सीजन होने के कारण ही बाजारों में इन दिनों ज्यादा मात्रा में कोटन के ही माल ज्यादा बनने के साथ बिक भी रहे है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कारखानों में गर्मी के मौसम मे जितने माल बनने चाहिये उतने माल नहीं बन रहे है। गर्मी के तेज पड़ने के कारण ही कारखानों में दिन की पाली में श्रमिक काम पर कम ही आ रहे है। शादी-विवाह का सीजन न होने के कारण ही खुदरा बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल घटी है।
व्यापारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पोलिएस्टर के धागे के भाव पेट्रोल के भाव बढ़ने के साथ ही पिछले एक माह से निरंतर तेजी का रूख बना है। धागे में तेजी के चलते ही बाजारों में तैयार मालों के भाव नहीं बढ़ने से कपड़ा उत्पादक परेशान हे। कैशमीलोन के मालों की भर्ती का समय चल रहा है। आउट सीजन में तैयार शाल के भाव गत वर्ष की तुलना में काफी तेज है। पंजाब में कैशमिलोन का माल तैयार बनाने वाली इकाइयों का कहना है कि धागे में तेजी के चलते ही भाव बढ़ाकर के बोलने पड़ रहे है। 
गर्मी के इस मौसम कोटन से बनने वाली आईटम की ही मांग बाजारों में ज्यादा बनी हुई है। चीन की सस्ती बिकने वाली चादरों की मांग गर्मी में शरीर को नुकसान देने के कारण ही अब लोगों को अब समझ में आने लगी है। अब उच्च समाज के परिवारों में इसकी बिक्री लगभग खत्म हो रही है। अब इन घटिया चादरों की मांग उन राज्यों में है। जहां उसके नुकसान की जानकरी नहीं है। अथवा जो ग्राहक केवल सस्ता माल चाहते है वो ही इन चादरों को पंसद करता है। यहां के व्यापारियों ने इसके प्लांट गुजरात व कस्बा पिलखुवा में लगने के बाद से सस्ती चादरों का उत्पादन यही पर आरम्भ कर दिया है। 
चादरों में गुडगांव, पानीपत व नोएडा में काम करने वाले एक्सपोर्टर बड़ी संख्या में यहा से माल को खरीदकर के दूसरे देशों को माल सप्लाई कर रहे है। यहां की बनी चादर विभिन्न निर्यातकों के माध्यम से ही अनेक देशों में सप्लाई हो रही है। कपड़े की चादरों में उत्पादन व सप्लाई में बड़ी मंडी होने के बावजूद राजनेता कि उपेक्षा के चलते ही यहां के कपड़ा कारोबारियों की समय-समय पर राजनेताओं से एक्सपोर्ट खोलने की मांग आज तक पूरी नहीं हो पायी है। यहां के व्यापारी यहां से सांसद व विदेश राज्य मंत्री वी. के. सिंह से मांग करने के चार साल बीतने के बाद भी यहां के व्यापारियों की मांग पूरी नहीं हो पायी है। 
कारखानों में गर्मी के चलते ही कपड़े का उत्पादन कम ही हो रहा है। तैयार कपड़ों की मांग कम होने से कपड़ा उत्पादकों का मनोबल गिरा हुआ है। आगामी सर्दी के मालो की भर्ती करने वाले अनेक व्यापारियों ने बताया कि गर्म माल की खरीददारी यहां के व्यापारी पंजाब से ही खरीददारी करते है। लेकिन कच्चा माल की तेजी के चलते ही व्यापारी नये मालों में हाथ डालते हुए कतरा रहे है। 
बाजारों में कामकाज गर्मी के हिसाब से होने चाहये थे वैसे नहीं हो रहे है। कपड़ा सप्लायरों ने बाजारों की स्थिती को समझते हुए ही अब लम्बी उधारी से अब हाथ खीचकर के नये मालों की सप्लाई को नकद में ही कर रहे है।

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