गेहूं पर सीमा शुल्क 10 % बढ़ा : सस्ते आयात पर लगेगी लगाम

गेहूं पर सीमा शुल्क 10 % बढ़ा : सस्ते आयात पर लगेगी लगाम

हमारे संवाददाता
केद्र सरकार ने गेहूं के सस्ते आयात से निप टने और घरेलू उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए गेहूं पर सीमा शुल्क की दर को 20 प्रतिशत से बढाकर 30 प्रतिशत कर दिया है।जिसको लेकर केद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने अधिसूचना जारी कर दी है।जिसके तहत कस्टम डृयूटी में बढोतरी गेहूं के रिकार्ड घरेलू उत्पादन के अनुमान के मद्देनजर की गई है।इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सस्ते गेहूं आयात की भी दहशत है।विशेष रुप से इस वर्ष रुस में गेहूं की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।
दरअसल घरेलू उत्पादन रिकार्ड स्तर पर रहने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष रुप से रुस से सस्ते आयात की चिंता को ध्यान में रखते हुए गेहूं पर आयात शुल्क में वृद्वि का फैसला लिया गया है।जिसको लेकर विशेज्ञों की तरफ से कहा गया है कि केद्र सरकार वैश्विक बाजारों से गेहूं की खरीद को सीमित करना चाहती है ताकि गेहूं की घरेलू कीमतों पर दबाव नहीं आए और 2017-18 फसल वर्ष (जुलाई-जून) को लेकर किसानें को कम से कम 1735 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सकेगा।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि किसानों ने 2017-18 की गेहूं फसल की कटाई लगभग पूरी कर ली गई है और सरकार उनसे समर्थन मूल्य पर अब तक 3.33 करोड़ टन गेहूं खरीद चुकी है।इस फसल वर्ष में सरकार ने काफी मात्रा में गेहूं की खरीदारी कर ली है।अब सरकार की नजर फ्लोर मिलों जैसे बल्क कंज्यूमर्स पर है।वह उन्हें 1900 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं बेचना चाहती है जो कि एक्स लुधियाना प्राइस है।ऐसे में यदि कस्टम डय़ूटी नहीं बढाई गई होती तो सरकार की गेहूं की ओपन सेल प्रभावित हो सकती थी।सरकार ने 2017-18 फसल वर्ष को लेकर अपने तीसरे अग्रिम अनुमान में गेहूं के रिकार्ड 9.861 करोड़ टन उत्पादन की उम्मीद जताई है।जबकि 2017-18 में 14.8 लाख टन गेहूं का आयात हुआ था।

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