इक्विटी, बांड, क्रिप्टो करेंसी, क्रूड आयल जैसी एसेट्स के सामने सोना की चमक धूमिल

इक्विटी, बांड, क्रिप्टो करेंसी, क्रूड आयल जैसी एसेट्स के सामने सोना की चमक धूमिल
सोना 1260 डॉलर से नीचे जाना मुश्किल: बाइंग के लिए उत्तम अवसर
 
इब्राहिम पटेल
इक्विटी, बांड, क्रिप्टो करेंसी और क्रूड ऑईल जैसी एसेट्स के सामने अभी-अभी सोना ने अपनी चमक खो दी है। मुख्य वजहों में मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेड रिजर्व की ब्याज वृद्धि की नीति शामिल हैं। चारो तरफ से ऐसे दबाव के कारण, वर्तमान में सोने की मांग में कमी हो रही है, जो कीमत को ऊपर जाने नहीं देती। हालांकि मौजूदा कीमतों पर सोने के व्यापारियों को अच्छा खासा समर्थन भी प्राप्त हो रहा है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र महेता ने कहा है कि इस स्थिति में यदि 2018 में कीमत 1300 डॉलर टिकी रहेगी तब भी यह उचित स्थिति मानी जाएगी। आगामी सप्ताहों में सोना दबाव में रहेगा, वास्तविक सपोर्ट 1272 डॉलर का है, अगर यह टूटता है तो बजार ज्यादा खराब होने की संभावना है। म चाहूंगा की भाव ऊपर रहे, मगर जब ट्रेड वोल्यूम और उथल-पूथल बजार से नदारद रहेंगी तब तो यह मुश्किल है। 
यहां तक कि इस सप्ताह भी, मजबूत डॉलर और बढ़ते बांड यिल्ड का जोखिम तो सोने पर मंड़राता रहेगा ही। सोने की कीमत को 1300 डॉलर को पार कराने के लिए निवेशक को अमेरिकी डॉलर की तेजी शांत न हो जाए तब तक इंतजार करना होगा। करेंसी बास्केट का डॉलर इंडेक्स 94 अंक की ओर अग्रेसर है। जो सोने को नीचे जाने के लिए दबाव पैदा करेगा, ऐसा सुरेंद्र महेता का मानना है। दूसरी छमाही में सोना अपने आप तेजी का रास्ता बनाएगा। इस स्थिति में फेडरल रिजर्व की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पिछले सप्ताह न्यू यॉर्क कोमेक्स पर सोना जून वायदा, दिसंबर 2017 के बाद पहली बार 2.2 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट के साथ 1291.30 डॉलर हुआ तब सवाल यह होता है कि वर्तमान समस्याओं हल हो जाने के बाद सोना कहां पहुंचेगा? रिद्धिसिद्धि बुलियन के सीईओ पृथ्वीराज कोठारी का कहना है कि मंदौड़ियों के सामने तेजौड़ियों अभी भी हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उनकी राय में, कीमत 1280 डॉलर से 1260 डॉलर से नीचे नहीं जाएगी। इस तरह के आशावाद के साथ वे कहते हैं कि इस कीमत पर खरीददारी के लिए अच्छा अवसर माना जाएगा।
सबकी नजर अमेरिकी डॉलर पर है, 10 साल के अमेरिकी बांड का ब्याज 3 प्रतिशत से ऊपर चला गया, वही बात अभी तो सोने को 1300 डॉलर से नीचे जाने के लिए नकारात्मक साबित हो गई है। रिद्धिसिध्धि के निर्देशक मुकेश कोठारी का कहना है कि अभी डरने के लिए कोई सिनेरियों नहीं है। बेशक, बाजार ने जोखिमभरा चरण में प्रवेश किया है। बुलियन बाजार में से अभी काफी पैसे वापिस खींचे जा रहे हैं? नहीं, क्योंकि मजबूत डॉलर और बढ़ते बांड रियल्ड ने अत्यधिक डिस्काउंट कर डाला है। हम दूसरी छमाही में सोने की कीमत 1300 डॉलर या इससे अधिक होने की संभावना को देख रहे हैं।
जिस तरह से बाजार फेडरल रिजर्व की ब्याज दर को प्रतिबिंबित कर रहा है, वह कुछ हद तक ज्यादा है। यिल्ड की चाल कुछ हद तक अभी भी स्थिर है और यूएस फेडरल रिजर्व में से आने वाला संकेत कहता है कि हम (फेड) मुद्रास्फीति की दर में अत्यधिक वृद्धि होने तक इंतजार करना चाहते हैं, ऐसा मुकेश कोठारी कहते है, यह संभव है कि, अमेरिकी फेड अभी धीमी चाल की नीति अपनाएगा, जो सोने के लिए सकारात्मक माना जाएगा।
शायद भू-राजनीतिक तनाव सोने को तेजी में जाने के लिए अधिक जुनून प्रदान कर सकता है, लेकिन वह अल्पावधि के लिए होगा, ऐसा रिद्धिसिद्धि बुलियन भी मानते हैं। अगर भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ेगा तब हमे लंबे समय तक ऊंची कीमत देखने मिलेगी, ऐसा तो सुरेंद्र महेता भी कहते हैं।

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