भारत कारोबारी लिहाज से विश्व में तीसरा सबसे बेहतर देश

भारत कारोबारी लिहाज से विश्व में तीसरा सबसे बेहतर देश
मोदी सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर आर्थिक लेखा-जोखा
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । मोदी सरकार के चार वर्ष 26 मई 2018 को पूर्ण हो चुके हैं।जिसके तहत देश में अब तक का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर जीएसटी व्यवस्था को लागू किया गया है जो कि उल्लेखनीय कदम रहा है।वहीं पुराने दिवालिया कानून को नया रुप दिया गया है।इसके साथ ही पुराने रुके हुए परियोजना को पुन: शुरु किया गया है और कारोबारी माहौल के दृष्टिगत अपने बेहतर प्रदर्शन से विश्व बैंक को यह करने पर मजबूर कर दिया कि भारत कारोबारी लिहाज से विश्व में तीसरा सबसे बेहतर देश है। बहरहाल देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष अभी भी काफी चुनौतियां है जिसे अल्पावधि में दुरुस्त किए जाने की आवश्यकता है। 
दरअसल मोदी सरकार के चार वर्ष पूर्ण हो गए हैं।जिसके तहत देश की अर्थव्यवस्था के हालात में बदलाव आए हैं और कारोबारी गतिविधियों को सकारात्मक रुख प्रदान करने की बेहद आवश्यकता है।चूंकि मोदी सरकार की तरफ से अपने कार्यकाल के अंतिम पूर्ण बजट फरवरी 2018 में प्रस्तुत किया था।जिसमें स्वास्थ्य और किसानों की आमदनी बढाने का वादा किया।जिसको पूरा करने को लेकर काफी मसकत करनी पड़ेगी।हालांकि मोदी सरकार की तरफ से चुनाव में वायदा किया था कि बढती कीमतों पर अंकुश लगाने,रोजगार के अवसर बढाने,भ्रष्ट्राचार समाप्त करने और गरीबो का उत्थान केया जाएगा।जिसको लेकर अब सिर्फ एक वर्ष ही बचा है ऐसे में आर्थिक मोर्चे पर काफी कुछ किए जाने की जरुरत है।हालांकि मोदी सरकार की तरफ से जीडीपी के आंकड़े के तरीके बदलने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में काफी तेजी आई।जिसके तहत नवम्बर 2016 में अचानक नकदी पर शिंकजा कसने से उन लाभों को समाप्त कर दिया गया।जिसके तहत 2017-18 वित्त वर्ष के समाप्ती पर देश की अर्थव्यवस्था 2.3 अरब डॉलर रह गया है जो कि पिछले चार वर्ष के कार्यकाल की सबसे धीमी रफ्तार रही।ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को अल्पावधि में दुरुस्त किए जाने की आवश्यकता है।बहरहाल देश में सोने को लेकर बढते आकर्षण और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्वि के चलते देश के व्यापार को घाटे में बना दिया है।ऐसे में चीन के साथ बेहतर संबंध नहीं रहने के बावजूद चीन से भारत का आयात बढा है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध है लेकिन इसको अल्पावधि में व्यापक रुप से दुरुस्त करने की आवश्यकता है।हालांकि मोदी सरकार की तरफ से विदेशी निदेश के मोर्चे पर एक दशक का रिकार्ड स्तर कायम किया है जो काबिले तारीफ है।जिसको लेकर भी काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है।

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