यार्न में अविरत तेजी के कारण वीवर्स और व्यापारी बड़े आर्डर लेने से विमुख


20/20 शीटिंग को साफ्ट फिनीश देकर डुप्लीकेट लिनन बनाने का घोटाला
 
मानसून जल्दी आ जाने के कारण कपड़े का आफ सीजन अग्रिम शुरू हो गया है। देश में कहीं गरमी, बारीश व आंधी-तूफान की स्थिति होने से ग्राहकी का अभाव है।
काटन यार्न के भाव में लगातार वृद्धि हो रही है। फलत: सूती कपड़े की कास्ट प्रति मीटर दो रु. तक बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद कपड़े का भाव केवल 25 से 50 पैसा जितना ही बढ़ पाया है। इस तरह कपड़ा अंडर कास्ट बिक रहा है। क्रूड तेल की तेजी से एक तरफ पोलिएस्टर यार्न का भाव बढ़ा है तो दूसरी तरफ ट्रान्सपोर्ट कास्ट भी बढ़ी है। इसके बावजूद सिन्थेटिक कपड़े की स्थिति बिक्री की तुलना में कुछ कमजोर है।
निर्यातकों के रिफंड की रकम जो पिछले कुछ महीनों से रुकी हुई थी वह अब आठ-दस दिन में दे देने का आश्वासन सरकार ने दिया है। यदि ऐसा हुआ तो निर्यातकों का आर्थिक संकट कम होने और निर्यातकों की मांग सुधरने की संभावना है। 
इसके अलावा सीएमएआई का 67वां नेशनल गार्म़ेंट फेयर 16 से 19 जुलाई मुंबई-गोरेगांव में आयोजित होगा। इसमें 1000 से अधिक स्टाल बुक हो गए हैं। इस गार्म़ेंट फेयर की सफलता पर कपड़ा बाजार की उम्मीद टिकी है।
कपड़ा बाजार में भारी आर्थिक संकट है और पेमेंट की मारामारी है। इससे व्यापारी व प्रोसेस हाऊस रेडीमाल नहीं रखते और आर्डर के हिसाब से माल तैयार करते हैं। माल की खपत के हिसाब से माल 15-20 प्र.श. कम ही बनाते हैं। जीएसटी के हिसाब से स्टाक रखना किसी को पोसाता नहीं है।
अहमदाबाद न्यू क्लाथ मार्केट के व्यापारी भारत भर में पुन: छोटे-छोटे लाट में तीन से चार महीने की उधारी पर माल बेचते हैं। इसमें उन्हें 40 प्र.श. का मुनाफा मिलता है। छोटे-छोटे लाट में माल बेचने से इसमें स्टाक लाट निर्माण होने का डर नहीं है। इसके अलावा पेमेन्ट की समस्या भी बहुत नहीं रहती जबकि बड़े ट्रेडर्स सदा विलंब में पड़ता है।
अहमदाबाद के अधिकांश बड़े प्रोसेस हाउस अब ट्रेडिंग नहीं करते बल्कि पूरे भारत भरके देशावरों में 100 मीटर के लाट में तीन महीने की उधारी में माल बेचते हैं। जो प्रोसेस हाउस इस प्रकार की ट्रेडिंग करते हैं  उनके पास अहमदाबाद के व्यापारी अपने डिजाइन नहीं छपवाते क्योंकि डिजाइन की कापी  हो जाने का डर रहता है। इसके मुकाबले मुंबई, डोम्बिवली, अंबरनाथ, वापी, तारापुर के प्रोसेस हाऊस मात्र जाब वर्क करते हैं। ट्रेडिंग नहीं करते हैं।
गार्म़ेंट इकाइयां कपड़े के सप्लायरों को छह से आठ महीने में पेमेंट करती हैं। इससे कपड़ा सप्लायर का दो वर्ष में मात्र तीन से साढे तीन टर्न ओवर होता है। इसमें यदि माल सप्लाई करना बंद करें तो बाकी की रकम डूब जाती है।
शर्टिंग्स की मांग 
शर्टिंग्स में पीस डाइड और प्रिंट की मांग है जबकि यार्न डाइड शर्टिंग्स की मांग बिल्कुल नहीं है। यार्न डाइड शर्टिंग्स मात्र स्टाकलाट में ही बिकती है। 
काटन आक्सफर्ड 40/40 140/80 67'' एयरजेट लूम के ग्रे कपड़े का सौदा 78 प्लस जीएसटी के भाव होता है। यह भाव पहले की तुलना में 5 प्र. श. अधिक है। इसमें ग्रे का 5 पना 67'' जबकि फिनिश कपड़े का पना 60'' आता है। गार्मेन्ट्स के ब्रांडेड शर्ट में यह क्वालिटी मान्य हो गई है। गुजरात के छत्रालय में यह क्वालिटी बनती है। इसके कारण भीलवाड़ा में जो काटन आक्सफर्ड कपड़ा बनना शुरू हो गया है इसकी मांग  घटी है और इसका कन्सेसलेशन आता है।  फाइनर काउन्ट में 50/50 और 60/60 काउन्ट में हैवी रीडपिक्स कपड़े की सेम्पलिंग हो रही है। यह आगामी सीजन में प्रस्तुत होगा। फिनिश काटन कपड़े का प्रति मीटर भाव 120 रु. है और 1.60 मीटर कट का कपड़े का कास्ट 180 से 185 रु. आता है। इसमें स्टीचिंग चार्ज का 100 से 125 रु. जुड़ जाए तो शर्ट की कास्ट 285 से 300 रु. हो जाती है। गार्मेन्ट ब्राण्डवाले रिटेल में यह शर्ट 1800 से 2000 रु. के भाव बेचते हैं। गार्मेन्ट्स की `ए' ग्रेड की ब्राण्डवाले इस क्वालिटी को वाशिंग का अच्छा इफेक्ट देकर 3000 से 3500 रु. के भाव यह शर्ट बेचते हैं। यह कपड़ा एकदम नरम आता है।
गार्मेन्ट एक्सपोर्ट के लिए 60/60 132/108 58''- एयरजेट लूम का डाइड कपड़े का 110 रु. के भाव में सौदा हुआ है। यह शर्ट फ्रांस से निर्यात होता है।
गार्मेन्ट्स एक्सपोर्ट्स में काटन फ्लैक्स कपड़ा भी अच्छा चलता है। 2/40/20 56/48 58'' फिनिश रेडी कपड़े का 96 रु. के भाव पर सौदा हुआ है। इस कपड़े का लुक लीनन जैसा नेचुरल आता है। 
एयरजेट लूम के काटन साटीन 60/60 165/104 ग्रे 67'' और फिनिश में 59'' से 60'' पने के कपड़े की मांग है। फिनिश कपड़े का सौदा 110 रु. के भाव पड़ा है। इसके बाद 60/60 175/120 साटीन डाइड का सौदा 117 रु. के भाव पड़ा है। 60/60 196/110 डाइड फिनिश का सौदा 125 रु. में पड़ा है। ट्रेडर्स इन किस्मों का भाव 20 से 25 रु. जितना अधिक बिकता है।

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