सूती धागे में ऊंचे भावों में व्यापार नहीं, पी.सी. घटा और रोटो सुस्त


हमारे संवाददाता
मौसम में घटते तापमान से थोड़ी राहत मिली है। लेकिन पावरलूम इण्डस्ट्रीज में बढ़ते सूती धागे के भावों में बुनकर दिन का चेन और रात की नींद हराम कर दी है। हालांकि बढ़ते भावों में ज्यादा कारोबार नहीं है। जिसको लगता है वो ही लेता है। कपड़ा में पड़ता नहीं होने से तथा कपड़ा नहीं बिकने से बुनकर हैण्ड टू माऊथ आ गया है। कपड़ा और सूत के दलाल मुतलिबभाई ने बताया कि मिल वाले यार्न के एक्सपोर्ट के चलते भाव बढ़ा रहे हैं। बाकी स्थानीय मार्केट में वो भी टिक नहीं पा रहे हैं। एक तो कपड़े का भाव बढ़ना चाहिए या फिर सूती धागे का भाव घटना चाहिए। अब एक बार सूत के भाव बढ़ना तो रुके है और घट भी सकते हैं। यार्न की खपत कम है, 7 दिन पावरलूम बंद रहने से यार्न नहीं लगेगा। इससे कपड़ा सुधर भी सकता है।
सूती धागा : सूती धागा शेयर मार्केट का बुल बना हुआ है। पुरा मई महीने देखते देखते निकला और आखरी सप्ताह में तेजी का बोलबाला हो गया। मालेगांव में कपड़ा सुस्त रहने से बुनकर यार्न में खाली रह गया। अब बाजार भाव से लेना मजबूरी है। सभी काउन्ट में भाव बढ़े हैं। सूत व्यापारी कहते हैं  मिल वाले अभी और तेजी में है। लेकिन स्थानीय भाव-तावों के साथ कामकाज को देखते हुए एक बार भाव कम हो सकते हैं। क्योंकि ऊंचे भावों में समर्थन नहीं मिल रहा है।
रोटो और पी.सी.: रोटो का यार्न मिल वालों ने भले ही नहीं घटाया होगा। लेकिन स्थानीय बाजार में 131 रुपये किलो से घटकर 130 रुपया किलो हो गया है। पी.सी. का यार्न 2/3 रुपया घटा सा लग रहा है। उसमें भी व्यापार नहीं के बराबर है। ये 20-20 के आईपीएल की तरह कपड़े में मैच चल रही है जिसका निर्णय आखरी ओवर या आखरी गेंद पर होना है। मेन सीजन का समय मंदी में चल रहा है। आढ़तिया कहते है कि बरसात में व्यापार चलता तो नहीं है।
सिट्रस कंपनी ने एजेन्ट नियुक्त कर हर महीने चेक द्वारा पेमेन्ट लेकर लगभग 7500 करोड़ संग्रह करने के बाद पेमेन्ट वापस नहीं दे पा रही है। कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा में लगभग 18 लाख लोगों से पैसा लिया है। स्थानीय एजेन्ट अमित पहाडे ने बताया कि कंपनी के मालिक गोयंका ओमप्रकाश वसंतलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनकी संपत्तियां बेचकर पैसा वापस किया जायेगा। अमित पहाडे और दूसरे एजेन्टो के हप्ते मालेगांव से बड़ी रकम जमा की गई है। अब एजेन्ट आश्वासन देने के अलावा कोई काम नहीं कर सकता। हालांकि साल भर में पूरा मूलधन देने की बात अमित पहाडे कहते हैं।

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