घरेलू चीनी मिलें तलाश रही चीन में चीनी निर्यात की संभावना


हमारे संवाददाता
-गन्ना किसानों के  बकाया भुगतान और वित्तीय संकट झेल रही घरेलू चीनी मिलों को उबारने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।जिसको लेकर चीनी मिलों की तरफ से इस दिशा में स्वयं पहल की है।जिसको लेकर इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की तरफ से पड़ेसी देश चीन में बाजार तलाशना शुरु कर दिया है।जिसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों चीनी के दौर पर हैं जहां वह चीनी की मांग को पूरा करने की संभावना ढूढ रहा है।
दरअसल यदि सब कुछ ठीक रहा तो आगामी दिनों में चीन में चीनी का निर्यात हो सकता है।जिसके तहत पड़ोसी देश चीन में चीनी की भारी मांग है जिसे वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरी करता है।ऐसे में भारत सरकार और घरेलू चीनी मिलों की कोशिश है कि उसकी चीनी मांग को वह पूरा करे।इसको लेकर चीनी मिलों और सरकार से लगातार संपर्क किया जा रहा है।चीन में भारतीय दूतावास की तरफ से घरेलू चीनी खपाने को लेकर प्रयास शुरु कमर दिए हैं जिसको लेकर बीजिंग में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसके तहत पहली जून 2018 को हुई संगोष्ठी में चीनी की कुल दो दर्जन से अधिक कंपनियों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।इनमें कच्ची चीनी (रॉ शुगर) की रिफाइनिंग करने वाली चीनी मिलों के प्रतिनिधि भी थे।इसमें चीनी मिलों सं संबंधित कई और कंपनियों ने हिस्सा लिया।इसमें चायना काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड,चायना शुगर एसोसिएशन और कोफ्को शुगर ने भाग लिया।इस संगोष्ठी में इस्मा के अध्यक्ष गौरव गोयल,इस्मा के महानिदेशक अबिनाश वर्मा और इंडियन शुगर एक्जिम कॉरपोरेशन के सीईओ अधीर झा ने संयुक्त रुप से भारतीय चीनी मिलों के मजबूत पक्ष को सबके सामने रखा।भारतीय दूतावास में आर्थिक व वाणिज्यक काउंसलर प्रशांत एस.लोखंडे ने दोनों के बारे में विस्तार से बात रखी।इस बाबत इस्मा के प्रतिनिधिमंडल को भारतीय राजदूत गौतल बंबावले ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी ने पिछली चीन यात्रा के दौरान चीनी निर्यात का मुद्दा उठाते हुए प्रस्ताव दिया।जिस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा का प्रमुख विषय था।उन्होंने भारतीय दूतावास को इस बारे में कार्य करने का निर्देश भी दिया था।

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