एफडीआई को लेकर मसौदा तैयार


अनुमति में नहीं होगा विलंब
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार ने जांच एजेंसियों की तरफ से फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमें (एफडीआई) की मंजूरी को लेकर उठाए गए सवालों को ज्यादा महत्व नहीं देते हुए एफडीआई को अनुमति को लेकर विस्तृत मसौदा तैयार किया है।केद्र सरकार की तरफ से एफडीआई के प्रस्तावों को मंजूरी देने में तेजी लाने और पारदर्शिता को बढावा देनू को लेकर फैसला किया है।जिसको लेकर केद्रीय सचिवों के पैनल ने सुरक्षा, भ्रष्ट्राचार, निदेशकों, टैक्स के मामलों,मनी लॉन्ड्रिंग और फंड की राउंड ट्रिपिंग और हादसों जैसे आरोपों को लेकर नियम तय किए हैं।
दरअसल इस मसौदे के तहत ऐसे किसी भी मसले की जांच की जाएगी।इसके अतिरिक्त कंपनियों सं संबंधित अन्य मुद्दों,उसकी पैरेंट कंपनी,सहायक कंपनियों और निदेशकों से किस तरह से डील किया जाए इस संबंध में मसौदा के तहत फैसला लिया जाएगा।इस समय देश में 95 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ऑटोमेटिक रुट के माध्यम से होता है जबकि डिफेंस, एविएशन,टेलीकॉम और सूचना एवं प्रसारण सेक्टर में आने वाले एफडीआई को लेकर संबंधित मंत्रालयों की मंजूरी की जरुरत होती है।चूंकि पिछले वर्ष केद्र सरकार की तरफ से फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को भंग किए जाने तक ऐसा कतई नहीं था और उस दौरान बोर्ड की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद एफडीआई आ जाता था।
हालांकि विगत माह के दौरान केद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि निचली रकिंग के अधिकारी इंवेस्टमेंट से संबंधित प्रस्तावों पर फैसला नहीं लें।जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि पिछले लगभग चार वर्ष़ों में 4600 एफडीआई योजनाओं को मंजूरी दी है।इसके साथ ही एफडीआई को मंजूरी की प्रक्रिया को भी 4 महीने से घटाकर 50 दिन तक कर दिया गया है।

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