देशभर में कपास की बोआई की रफ्तार धीमी

देशभर में कपास की बोआई की रफ्तार धीमी

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । चालू खरीफ फसल मौसम को लेकर देश के विभिन्न उत्पादक राज्यों में कपास की बोआई शरु हो रखी है।जिसको लेकर इस बार कपास की बोआई की चाल अपेक्षाकृत धीमी है क्योंकि पिछले वर्ष कपास फसल में रोग लगने के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।जिसके चलते इस बार किसान कपास की बोआई करने के बजाय सोयाबीन व मक्का की खेती करने की ओर उन्मुख हो रहे हैं।
दरअसल केद्रीय कृषि मंत्रालय की तरफ से चालू खरीफ फसल मौसम को लेकर कपास फसल की बोआई को लेकर जो ताजा आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।जिसके तहत पहली जून तक देश के विभिन्न उत्पादक राज्यों में कपास की बोआई 72.61 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई।जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान कपास की बोआई 77.62 लाख हैक्टेयर में हो गई थी। जिससे पिछले कपास बोआई मौसम की तुलना में चालू कपास बोआई मौसम में अब तक कपास की बोआई 5.06 प्रतिशत तक कम हो पाई है।चूंकि पिछले कपास फसल मौसम में देश के विभिन्न उत्पादक राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र,कर्नाटक,तेलंगाना आदि में कपास फसल में बीमारी लग गई थी जिससे कपास की उत्पादकता विशेष रुप से प्रभावित हुई थी।जिससे किसानों की कपास की खेती करने में सीधे तौर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा था।जिसके चलते किसानों की तरफ से इस बार कपास की बोआई के बजाय अन्य फसलों जैसे कि सोयाबीन,मक्का आदि की बोआई करने को लेकर विशेष रुप से उन्मुख हो रहे हैं।इसबीच विभिन्न कारकों के चलते कपास का निर्यात पड़ोसी देशों सहित अन्य खपत वाले देशों में बढा है।जिसके बावजूद किसानों को अपने उपज के अच्छू मूल्य प्राप्त नहीं हो पाए हैं।जिससे किसान कपास की बोआई करने से सीधे तौर पर हिचक रहे हैं ।ऐसे में देखना यह होगा कि अभी तो कपास बोआई को लेकर शुरुआती दौर है।जिससे आगे कपास की बोआई को लेकर क्या रुख रहता है जिसको लेकर देश के कपड़ा व्यापार उद्योग सहित केद्र व राज्य सरकारों की तिरछी नजर टिकी हुई है और देखो और इंतजार करो की नीति अख्तियार किए हुए हैं।

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