रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के प्रयास तेज : लड़ाकू विमान की खरीद में विदेशी निवेश की संभावना बढ़ी

रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के प्रयास तेज : लड़ाकू विमान की खरीद में विदेशी निवेश की संभावना बढ़ी

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । विदेशी निवेश के दरवाजे खोले जाने के बावजूद रक्षा क्षेत्र में निवेश नहीं आ रहा है।जिससे केद्रीय रक्षा मंत्रालय इसको लेकर बेहद चिंतित है।ऐसे में केद्रीय रक्षा मंत्रालय की योजना अब यह है कि इसको लेकर रणनीतिक साझेदारी में बनने वाले रक्षा उपकरणों की खरीद को बढाए जाए ताकि विदेशी कंपनियां भारत में ही अपने कारखाने स्थापित करने की पहले करें।
दरअसल एनडीए सरकार की तरफ से रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढाकर 49 प्रतिशत की थी। बहरहाल इसके बावजूद विदेशी निवेश के प्रस्ताव नहीं मिले।जिसके बाद नियमों में फिर बदलाव किया।जिसमें यह जोड़ा गया कि यदि आधुनिक प्रौद्योगिकी मिल रही हो तो निवेश की अनुमति 100 प्रतिशत तक दी जा सकती है।जबकि पूर्व में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर ही 49 प्रतिशत से अधिक के निवेश की मंजूरी दी जा सकती थी।बहरहाल इस बदलाव के बाद भी कोई सार्थक नतीजे नहीं निकले।ऐसे में जो निवेश प्रस्ताव मिले हैं वह महज कुछ करोडों रुपए के ही है।बहरहाल केद्र सरकार ने हिम्मत नहीं हारी है और केद्र सरकार ने फिर पहल की है।जिसके तहत रक्षा सौदों में मेक इन इंडिया की शर्त जोड़नी शुरु कर दी गई है।इधर जितने भी रक्षा सौदों की मंजूरी दी जा रही है जिसमें यह प्रावधान जूड़ा जा रहा है कि निर्माण देश में ही किया जाए। जिससे निवेश की उम्मीद बढ रही है क्योंकि कंपनियां पइहले ऑर्डर हासिल करेंगी जिसके बाद रणनीतिक साझेदारी में निर्माण शुरु करेंगी।जिसको लेर केद्रीय रक्षा सचिव संजय मित्रा ने कहा कि केद्र सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों से रणनीतिक साझेदार करके देश में ही रक्षा साजो सामान का निर्माण करें।जिससे रक्षा क्षेत्र में निवेश बढेगा।उन्होंने भरोसा जताया कि रणनीतिक साझेदारी से आगामी दिनों में विदेशी निवेश में बढोतरी देखने को मिलेगी।उल्लेखनीय है कि हाल ही में केद्रीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से वायुसेवा को लेकर 110 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर आपूर्तिकर्ताओं से जो प्रस्ताव मांगे जहैं  उनमें रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया गया है।

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