एयर इंडिया विनिवेश की मार्च, ''19 से पहले होगी कोशिश

एयर इंडिया विनिवेश की मार्च, ''19 से पहले होगी कोशिश

संशोधन बोली मानक जल्द लाने की संभावना
 
हमारे संवाददाता 
नई दिल्ली । केद्र सरकार की तरफ से कर्ज के बोझ तले दबी सार्वजनिक विमानन कंपनी एयर इंडिया के विनिवेश की कोशिश जारी रखेगी।जिसको लेकर एयर इंडिया की तरफ से कहा जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष में ही विमानन कंपनी के विनिवेश की कोशिश के तहत केद्र सरकार की तरफ से जल्द संशोधित बोली मानक ला सकती है।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि केद्र सरकार को पिछले बोली के तहत एक भी बोलीकर्ता के सामने नहीं आने की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।ऐसे में कंपनी का विनिवेश अभी पूरी तरह से विचार का हिस्सा बना हुआ है।
दरअसल एयर इंडिया में 76 प्रतिशत और उसकी दो सहयोगी शाखाओं के विनिवेश को लेकर बोलीकर्ता ने कंपनी की हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।जिसको लेकर केद्रीय नागर विमानन मंत्रालय की तरफ से अब उस बोली के लेनदेन सलाहकार से इस बारे में विवरण जुटा रही है कि किन वजहों से निवेशक एयर इंडिया और उसकी दो सहयोगी कंपनियों में निवेश से पूरी तरह से दूर रहे।हालांकि कहा जा रहा है कि बदली परिस्थितियों में केद्र सरकद्रार की तरफ से एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री पर विचार की संभावनाओं को खारित कर दिया।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि विनिवेश के पिछले कुछ मानकों के सरलीकरण पर विचार किया जा रहा है।बहरहाल यह सरलीकरण कंपनी के विनिवेश के मूल उद्देश्यों से पूरी तरह अलग नहीं होंगे।जिसको लेकर हा जा रहा है कि केद्र सरकार की तरफ से एयर इंडिया के विनिवेश के बारे में बाजार की प्रतिक्रियाओं को लेकर लेनदेन सलाहकार से विचार विमर्श कर रही है।जिसको लेकर एयर इंडिया की तरफ से कहा जा रहा है कि केद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय की तरफ से प्राथमिक सूचना प्रपत्र् (पीआइएम) के उन प्रावधानों पर विचार करेगा जिनमें बदलाव की आवश्यकता है।विभाग संशोधित पीआइएम को पहले विनिवेश व सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन (डीआईपीएएम) के तहत गठित अंतर मंत्रालयी समूह की मूल्याकंन समिति को भेजेगा।जिसके बाद यह मामला विनिवेश मामलों पर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले कोर ग्रुप को भैजा जाएगा।इन दो ग्रुप के विचार विमर्श के बाद यह मामला एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर केद्रीय वित्त मंत्री के नेतृत्व में गठित वैकल्पिक तंलि को इसी महीने के अंत तक भेजे जाने की संभावना है।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर विदेशी फंड मैनेजर्स के मामले में कुछ स्पष्टता की जरुरत होगी।

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