चीनी पर सेस लगाने के काउंसिल के अधिकार पर राय देंगे एजी

चीनी पर सेस लगाने के काउंसिल के अधिकार पर राय देंगे एजी

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली-चीनी पर 5 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर तीन रुपए किलो की दर से सेस लगाने के मसले पर अब अटॉनी जनरल की राय आने के बाद फैसला होगा।जिसको लेकर केद्रीय वित्त मंत्रालय की तरफ से जीएसटी काउंसिल ने इस मसले पर केद्रीय कानून मंत्रालय की राय मांगी थी बहरहाल कानून मंत्रालय ने अब अटॉनी जनरल के पास इस मामले की फाइल को भेज दी है।
चूंकि चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाए की समस्या का हल निकलाने को लेकर जीएसटी काउंसिल की 4 मई 2018 को बैठक हुई थी जिसमें केद्र सरकार ने चीनी पर सेस लगाने का प्रस्ताव रखा था।हालांकि इस समय चीनी पर  फिलहाल 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है।ऐसे में सेस इससे अलग होगा।जिसको लेकर केद्र सरकार का अनुमान है कि चीनी पर सेस से लगभग 6700 करोड़ रुपए जुटाए जा सकते हैं।जिससे चीनी मिलों को संकट से उबारने को लेकर किया जा सकता है।इस बैठक में असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा की अगुवाई में एक मंत्रिसमूह गठित किया गया था जिसे इस पर फैसला लेना था।इस मंत्रिसमूह में उत्तर प्रदेश,केरल,तमिलनाडु और महाराष्ट्र के वित्त मंत्री बतौर सदस्य शामिल हैं।बहरहाल इस मंत्रिसमूह की 14 मई 2018 को हुई पहली बैठक में यह प्रश्न उत्पन्न हो गया कि जीएसटी काउंसिल को सेस लगाने का अधिकार है अथवा नहीं।इस बैठक में केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने चीनी पर सेस लगाने के प्रस्ताव का घ्ॅरोध किया था।जिसके बाद ही जीएसटी काउंसिल ने केद्रीय कानून और केद्रीय खाद्य मंत्रालय से इस मसले पर सलाह लेने का फैसला किया।इस समय केद्रीय कानून मंत्रालय ने इस पर औपचारिक रुप से कोई राय नहीं दी है।हालांकि केद्रीय खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों की तरफ से कहा जा रहा है कि चीनी पर सेस लगाने के प्रस्ताव में कोई दिक्कत नहीं है।चूंकि चीनी से संबंधित कुछ केद अदालत में लंबित हैं ऐसे में केद्रीय कानून मंत्रालय ने फिलहाल केद्रीय वित्त मंत्रालय व जीएसटी काउंसिल को इस संबंध में कोई राय नहीं दी है।ऐसे में केद्रीय कानून मंत्रालय के अधिकारियों की तरफ से कहा जा रहा है कि अटॉनी जनरल ही अदालत में केद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसको लेकर यह मामला उनके दायरे में आता है।ऐसे में जीएसटी काउंसिल और केद्रीय वित्त मंत्रालय की तरफ से कानून राय के संबंध में आया प्रस्ताव कानून मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल के पास भेज दिया है।उल्लेखनीय है कि जीएसटी व्यवस्था के तहत सिर्फ लक्जरी और अवगुणी वस्तुओं पर ही जीएसटी की अधिकतम 28 प्रतिशत दर के अतिरिक्त सेस लगाने का प्रावधान है।इसे क्षतिपूर्ति सेस के तौर पर जाना जाता है।जिसका इस्तेमाल केद्र सरकार राज्यों को होने वाली राजस्व क्षतिपूर्ति की भरपाई को लेकर करती है।ऐसे में अब यह प्रश्न उठ रहा है कि जीएसटी काउंसिल चीनी पर सेस लगा सकती है या नहीं।

© 2018 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer