सूरत में एक लाख पावरलूम भंगार में

सूरत में एक लाख पावरलूम भंगार में
ख्याति जोशी
सूरत। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद सूरत के कपड़ा उद्योग की खराब दशा है- कपड़ा उद्योग को तो थोड़ी राहत मिली परंतु वीविंग उद्योग की हालत तो दयनीय बनी हुई है। पिछले डेढ़ वर्ष में एक लाख से भी अधिक संख्या में पावरलूम भंगार में गये होने का अनुमान है। सरकार आगे ध्यान नहीं दे तो असंख्य यूनिटों में ताला मारने की नौबत आएगी। ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।
देशभर में पोलिएस्टर कपड़ा का सबसे ज्यादा उत्पादन सूरत में होता है। सूरत में एक समय साढ़े छह लाख पावरलूम कार्यरत थे। आज शहर में एक लाख जितना पावरलूम मंदी की मार नहीं सह सकने के कारण भंगार में बेच दिया गया है। बाकी जो चालू है वह वीविंग यूनिट के उद्योग के लोगों द्वारा एक पाली में काम उत्पादन लेना शुरू किया है।
पांडेसरा वीवर्स को-आपरेटिव सोसायटी के प्रमुख आशिष गुजराती ने कहा कि वीवर्स एक लाख पावरलूम भंगार में कैसे जाने दिया होगा? यह विचार थोड़ा आता है लेकिस उद्योग मुश्किल में है। हमने सरकार से वीवरों की मुश्किलों को एक से अनेक बार प्रस्तुत की है। महाराष्ट्र में उद्योग को जो प्रोत्साहन मिलता है ऐसी नीति बन सकती है। परंतु गुजरात में इस प्रकार की नीति बनती नहीं है। सरकार अब भी नहीं विचार करेगी तो उद्योग महाराष्ट्र की तरफ जा सकता है, इसमें कोई शंका नहीं है।
दक्षिण गुजरात चेम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रमुख हेतल मेहता ने कहा कि एक बात तो स्वीकार करना ही पड़ेगा की सूरत में कपड़ा उद्योग का उत्पादन घटा है। उत्पादन घटने के कारणों में जीएसटी की नोटबंदी जवाबदार है की नहीं उसका अध्ययन करता रहा। परंतु एक दूसरी बात इतनी ही महत्वपूर्ण है कि यहां के उद्यमी अपग्रेडेशन की तरफ बढ़े है। अब एक वाटरजेट मशीन चार पावरलूम्स की क्षमता की काम कर रही है। एक लाख पावरलूम जो भंगार में गया है, तो दूसरी ओर कितनी नई वाटरजेट मशीन आई है। यह अध्ययन करने की जरूरत है। पिछले ढाई वर्ष़ों में शहर के उद्यमियों के पास कितना वाटरजेट मशीन शुरू हो गई है। इसका विस्तृत अध्ययन किया नहीं गया है।

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