चीनी बनी कारखानों के लिए मीठी, ग्राहकों के लिए कड़वी

चीनी बनी कारखानों के लिए मीठी, ग्राहकों के लिए कड़वी
चीनी में 2013 की कोटा पद्धति पुन: अमल में
 
मणिलाल गाला
मुंबई। चालू सीजन में चीनी का बम्पर उत्पादन होने के कारण चीनी का भाव घटने से केद्रीय खाद्यान्न मंत्रालय ने चीनी मिलों के लिए न्यूनतम भाव प्रति क्विंटल 2900 रु. निर्धारित किया था इसके साथ पुन: मासिक सुगर सेल्स कोटा की पद्धति शुरू करने से पिछले एक सप्ताह में चीनी के भाव में प्रति किलो 5 से 7 रु. का उछाल आने से सरकार दुविधा में पड़ गयी है।
चालू सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 315 लाख टन हुआ था और कैरीफारवर्ड स्टाक 40 लाख टन था। इस तरह चीनी का कुल उपलब्ध आपूर्ति 355 लाख टन रहा। देश की वार्षिक खपत 250-255 लाख टन है। इस तरह 100 लाख टन अधिक चीनी उपलब्ध है। मांग की अपेक्षा आपूर्ति बढ़ जाने से चीनी का एक्समिल भाव प्रति क्विंटल 2400 से 2500 रु. के निम्न स्तर पर पहुंच गया। इसके कारण किसान सहित आर्थिक तंगी से जूझ रही चीनी मिलें और संकट में पड़ गयी। सरकार मिलों और किसानों की मदद के लिए सरकार ने न्यूनतम भाव 2900 रु. निर्धारित किया। दूसरी तरफ सरकार का लक्ष्य यह भी था कि उपभोक्ताओं को खुदरा में चीनी अधिकतम 40 रु. प्रति किलो मिलना चाहिए इससे भाव नहीं बढ़ना चाहिए।
दूसरी तरफ 2013 में समाप्त की गयी सुगर रिलीज कोटा की पद्धति पुन: अमल में लाने का निर्णय किया गया। देश की सभी 528 चीनी मिलों को हर महीने बिक्री का आंकड़ा पेश करने को कहा गया। 
अतीत में चीनी की बिक्री पर नियंत्रण लगाने के लिए कोटा रिलीज का नियम अमल में था वह पुन: लागू किया गया। इस द्वन्द में चीनी का भाव पिछले सप्ताह प्रति क्विंटल 600 से 700 रु. बढ़ गया था। बाम्बे सुगर मर्च़ेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार यू. जैन और मंत्री मुकेश एच वाड़िया ने कहा कि आगामी त्योहारों के सीजन में चीनी के बंपर उत्पादन का लाभ आम जनता को मिलें और भाव उचित स्तर पर बना रहे इसके लिए सरकार को विशेष ध्यान रखना चाहिए। चीनी मिलों का मानना है कि मासिक बिक्री पर नियंत्रण लगने से उनके बिक्री पर असर पड़ेगा और 22 हजार करोड़ रु. के भारी एरियर्स परभायी करने में और विलंब होगा।

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