वालमार्ट एवं फ्लिपकार्ट डील के खिलाफ व्यापारियों का 2 जुलाई को विरोध-प्रदर्शन

वालमार्ट एवं फ्लिपकार्ट डील के खिलाफ व्यापारियों का 2 जुलाई को विरोध-प्रदर्शन

रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । वालमार्ट एवं फ्लिपकार्ट डील को लेकर खिलाफत कर रहे कंफेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की तरफ से 11 जून 2018 को गुजरात के अहमदाबाद में देश भर के व्यापारियों की एक दो दिवसीय सम्मेलन आहूत की गई थी।जिसमें फैसला किया गया कि आगामी 2 जुलाई 2018 को देश भर के विभिन्न राज्यों के विभिन्न शहरों में 1000 जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।जिसको लेकर कैट की तरफ से केद्र सरकार से गुजारिश की गई हे कि वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को अविलम्ब रद्द किया जाए और ई-कॉमर्स को लेकर नीति बनाया जाए और एक रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए।
इस बाबत कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस बार हम ईडी और आरबीआई के साथ इस मुद्दे को आखिर तक लेकर जाएंगे जिसमें फ्लिपकार्ट और उसका नया मालिक वालमार्ट शामिल है सहित ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं हो जाती है हम चैन से नहीं बैठेंगे।उन्होंने कहा कि जब तक ई-कॉमर्स पॉलिसी नहीं बन जहाए तब तक एफडीआई पॉलिसी का प्रेस नोट नंबर 3 का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए जाएं और उसको देखने को लेकर अधिकारियों सहित व्यापारियों एवं ई-कॉमर्स कंपनियों की एक विशेष टास्क फोर्स बनाई जाए।उन्होंने यह भी मांग की है कि ई-कॉमर्स पॉलिसी बनाने में व्यापारियों को भी विश्वास में लिया जाए।
 उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियां खुले रुप से और धड़ल्ले से 29 मार्च 2016 को जारी केद्र सरकार के प्रेस नोट नंबर 3 का उल्लंघन कर रही है।इस प्रेस नोट में ई-कॉमर्स कंपनियें पर यह स्पष्ट पाबंदी है कि वह किसी भी प्रकार से कीमतों को प्रभावित नहीं करेगी एवं खुले बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखेंगी।ऐसे में अनेकों शिकयतें करने के बावजूद यह कंपनियां भारत को खुला कारोबारी मैदान मानते हुए अपने बनाए हुए नियम एवं कायदों से कारोबार कर रही है और केद्र सरकार एक मूक दर्शक बनी हुई है।चूंकि आजतक किसी कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं हुई।
उन्होंने शिकायत भरे लहजे में कहा कि पिछले चार वर्ष़ों में केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक बार भी घरेलू व्यापार को मजबूत करने को लेकर एक भी बैठक नहीं बुलाई जबकि बेहतर तत्पर्यता दिखाते हुए ई-कॉमर्स एवं रिटेल में एफडीआई पर कदम उठाने में कोई कोताही नहीं बरती है।इ ससे स्पष्ट होता है कि रिटेल ट्रेड एक अनाथ बच्चे की तरह है जिसका कोई वारिस नहीं है।ऐसे में केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को इसको देखना चाहिए था बहरहाल इस दिशा में केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने आजतक एक भी कदम नहीं उठाया।
 श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा कि केद्र सरकार के इस रवैये से देश भर के व्यापारियों में आक्रोश है।जिसके तहत केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय का रिटेल व्यापार के प्रति रुखापन उसकी विदेशी कंपनियों के प्रति  आस्तिकता की मानसिकता को दर्शाता है जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।इश में कृषि के बाद रिटेल व्यापार सबसे अधिक रोजगार देता है और सरकारी खजाने में भी इसका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है फिर भी इसकू सदा अपेक्षित रखा जाता है।ऐसे में केद्र सरकार को अविलम्ब ई-कॉमर्स और रिटेल ट्रेड को अपनी प्राथमिकता पर लेकर उसकी समुचित वृद्वि को लेकर कदम उठाने चाहिए।

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