कश्मीर : निर्णायक दौर

कश्मीर में गवर्नर शासन घोषित होने के पाद अब क्या? भाजपा ने तीन वर्ष के पश्चात पीडीपी के साथ की भागीदारी छोड़ दी, तत्पश्चात किसी वैकल्पिक सरकार की संभावना नहीं है अर्थात् देर-सबेर चुनाव के सिवाय दूसरा विकल्प भी नहीं है। विपक्ष शोर मचा रहा है कि लोकसभा के  चुनाव में लाभ उठाने के लिए भाजपा ने कश्मीर में सरकार-सत्ता छोड़ी है वस्तुत: कश्मीर में स्थिति सुधरने की आशा नहीं थी सभी प्रयास विफल रहे। मुख्यमंत्री अलगाववादियों, आतंकवादियों और पथ्थरबाजों के साथ सख्ती से कार्यवाही करने को तैयार नहीं थी, उनकी हल्की-अलगाववादियों के साथ हमदर्दी के कारण भाजपा की विफलता साबित होती थी। इसलिए अंतिम कदम उठाना पड़ा अब जम्मू-कश्मीर का चुनाव लोकसभा के साथ-साथ दिसंबर अथवा मार्च-अप्रैल में हो सकेगा ऐसा अनुमान है।
इस बीच कश्मीर में कदम उठाने के बाद पाकिस्तान शांत नहीं रहेगा। नरेद्र मोदी के शासन में प्लान सफल नहीं होगा तो पाकिस्तान बौखला कर कितना आक्रामक बनता है यह देखना है- भारत की सेना तैयार है इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि दिसंबर तक का समय निर्णायक चरण साबित होगा।
केद्र सरकार का व्यूह अलगाववादियों को- कश्मीरी जनता से अलग रखने तथा पाकिस्तानी आतंकवादियों को तेजी से खत्म करते रहने का है इस कार्यवाही में अवरोध-विरोध और पथ्थरबाजी सहन नहीं कि जा सकती। भारतीय सेना का विशेषाधिकार राष्ट्रपति की रक्षा के लिए है `संरक्षण और सफाई' के साथ जम्मू और कश्मीर लद्दाख क्षेत्र में विकास योजनाओं को तेजी से अमल में लाया जायेगा। कश्मीर में रेलवे सेवा जैसी अनेक योजनाओं का अमल हुआ है, लेकिन अलगाववादियों के प्रभाव और प्रचार के परिणामस्वरूप उसका यश केद्र सरकार को नहीं मिला।
गवर्नर शासन शुरू होते ही केद्रीय गृह विभाग ने `अलकायदा' की एक शाखा`अलकायदा इन इंडिया सब कांटिनेंट' (एक्यूआईएस) तथा स्लामिक स्टेट (आईएस) की अफगानिस्तान शाखा पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये दोनों आतंकवादी संस्थाएं भारत से युवकों को भरती करती थी उड़ीसा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दो व्यक्ति पकड़े गये है । सोशियल मीडिया पर भारत विरोधी संदेश प्रसारित करने वाले भी पकड़े गये हø।
भारतीय संविधान के प्रावधान के अनुसार जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमतवाली सरकार संभव न हो तो राज्यपाल का शासन घोषित हो और छह महीने के बाद राष्ट्रपति शासन की घोषणा की जाए और दो महीने में संसद द्वारा उसे मंजूरी देनी पड़ेगी। यदि संसद का सत्र चालू हो तो ऐसी मंजूरी एक महीने में देनी चाहिए। कश्मीर में गवर्नर शासन के छह महीने की अवधि 20 दिसंबर को पूरी होगी और राष्ट्रपति शासन प्रारंभ हो तब तक संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हो जायेगा और राष्ट्रपति शासन को अनुमोदन फरवरी के बजट सत्र में मिल सकता है। यह समयपत्रक जानना पड़ेगा।
चुनाव के बिना वैकल्पिक सरकार संभव नहीं है त्रिशंकु विधानसभा में पीडीपी और कांग्रेस की सरकार संभव नहीं हो सकी। कांग्रेस की सिर्फ 12 सदस्य और पीडीपी के सभी सदस्यों में जम्मू का एक भी हिन्दू सदस्य नहीं था फिलहाल उमर अबदुल्ला और कांग्रेस दोनों ने पीडीपी-महबुबा मुफ्ती के साथ सरकार अथवा सहयोग करने से इनकार किया है। चुनाव हो तब अबदुल्ला और कांग्रेस एक साथ होंगे। तब तक पीडीपी हिन्दू पार्टी के साथ हाथ मिलाये इससे महबुबा विरोधी प्रचार होगा।
जहां तक भाजपा का संबंध है- शिवसेना से कांग्रेस तक सभी लोग भाजपा की `कमजोरी' की आलोचना करते थे। आतंकवादियों और पथ्थरबाजों का परोक्षरूप से समर्थन और भारतीय सेना की आलोचना करते थे। भारतीय सेना ने पथ्थरबाजों को रोकने के लिए उनके कश्मीर युवक को-जीप के उपर बांधकर `ढाल' के रूप में उपयोग किया तो विपक्ष और `मानवतावादी लोग' सेना और भाजपा पर टूट पड़े!
अब कांग्रेस के- मूल कश्मीरी नेता गुलाम नबी आजाद कहते है कि भारतीय सेना ने आतंकवादी की अपेक्षा कश्मीरी नागरिकों को अधिक मारा है! अब गवर्नर शासन में `कत्लेआम' होगा ऐसा आरोप लगाकर कश्मीरी ही नहीं पूरे भारत में मुस्लिम समाज को उकसाने का प्रयास किया जाता है?
पी. चिदम्बरम् तो कहते है कि गवर्नर एनएन वोहरा की अवधि समाप्त होने पर उनके स्थान पर आक्रामक गवर्नर को बैठाकर भाजपा सरकार `मर्दाना'- व्यूह शुरू करना चाहती है, परंतु कड़े हाथ से काम करना चाहती है!- प्रश्न यह है कि विपक्ष क्या चाहते है? अलगाववादियों की पीठ थपथपाकर उनका पैर पकड़ना चाहती है? फिलहाल अलगाववादी नेता लोग `गृहकैद' कैद के तहत है। कश्मीर के वरिष्ठ संपादक का शकमंद हत्यारा-गुनाहखोर है और उनके विरुद्ध कड़ाई के बिना नहीं चलेगा। कश्मीरी जवान औरंगजेब की हत्या आतंकवादियों के करने के बाद उनके पिता ने (जो-निवृत्त सैनिक है) भारतीय सेना से आवाहन किया है कि आतंकवादियों को 72 घंटे में खत्म करो.. यह आवाज और भावना आम आदमी की है। विपक्ष चाहे जो आलोचना करे- कश्मीर में कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए कड़ाई से काम नहीं किया गया तो पाकिस्तान को खुला मैदान मिल जायेगा।
यूपीए की प्रथम सरकार ने मंत्री पद पर रह चुके कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज का कहना है कि ``पाकिस्तानी पूर्व प्रमुख परवेज मुशर्रफ सच कहा था कि कश्मीरियों को आजादी ही चाहिए-'' अभी भी केद्र सरकार को हुर्रियत नेताओं के साथ बातचीत करनी चाहिए...! वस्तुत: सोज का ऐसा भी कहना है कि नहेरू और इंदिरा गांधी ने भी 1953 से कश्मीरियों के साथ अन्याय किया है।
सैफुद्दीन सोज की पुस्तक-कश्मीर का इतिहास-शीघ्र प्रकाशित होने वाली है। 

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