खरीफ फसल मौसम : तिलहनों की बोआई का रकबा बढ़ने की उम्मीद

खरीफ फसल मौसम : तिलहनों की बोआई का रकबा बढ़ने की उम्मीद

हमारे संवाददाता                    
घरेलू खाद्य तेल उद्योग संगठनों की तरफ से कहा जा रहा है कि केद्र सरकार ने सोयबीन,मूंगफली,सूर्यमुखी व कनौला तेल के आयात पर शुल्क बढाने का फैसला सही समय पर लिया है क्योंकि इससे खरीफ तिलहनों की बोआई में किसानों की दिचलस्पी बढेगी।वहीं दूसरी तरफ खाद्य तेल का आयात कम होने से देसी तिलहनों की मांग बढेगी ओर किसानों को उपज का अच्छा दाम मिलेगा जिससे उत्साहित होकर किसान अधिकाधिक तिलहनों की खेती करने को उत्सुक होंगे।
इस बाबत सॉल्वेंट एक्स्टैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक डॉ.बी.वी.मेहता ने कहा कि तिलहनों पर आयात शुल्क बढने से किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिलना सुनिश्चित होगा। किसानों को यदि तिलहनों का उचित दाम मिलेगा तो तिलहन की खेती करने में दिलचस्पी बढेगी ओर तिलहनों के आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी। डॉ.मेहता ने कहा कि किसानों को तिलहनों को लेकर केद्र सरकार की तरफ से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से यदि अधिक दाम मिलेगा तो स्वभाविक है अन्य फसलों के बजाय वह तिलहन खेती करने को उत्सुक होंगे।जिसको लेकर केद्र सरकार ने सही समय पर यह फैसला लिया है।उन्होंने कहा कि घरेलू उद्योग का फायदा किसानों के फायदे से संबंधित है।जिसके तहत किसान अधिक तिलहनों की खेती करेंगे और पैदावार बढेगी तो खाद्य उद्योग का कारोबार बढेगा।उन्होंने कहा कि खाद्य तेल की हमारी जितनी मांग है उतनी घरेलू आपूर्ति नहीं है जिसको लेकर आयात की आवश्यकता बनी रहेगी।हमारा तिलहन उत्पादन 90/95 लाख टन वार्षिक है और वार्षिक खाद्य तेलों का आयात लगभग 140/150 लाख टन है।जिसकें लेकर घरेलू उत्पादन बढाने की आवश्यकता है जो कि तभी संभव है जब तिलहन की पैदावार बढेगी। वहीं सेन्ट्रल ऑरगेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्रीज एण्ड टेड (कोएट) के अध्यक्ष श्री लक्ष्मी चंद अग्रवाल ने कहा कि इस वर्ष तिलहनों का रकबा बढेगा क्योंकि किसान ऊंचे भाव में उपज बिकने की उम्मीदों से तिलहनों की खेती में वेशेष रुप से रुचि लेंगे।जिसको लेकर पिछले दिनों केद्र सरकार की तरफ से कच्चा सोयबीन तेल पर आयात शुल्क 30 प्रतिशत से बढाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया है और रिफाइंड सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क 35 प्रतिशत से बढाकर 35 प्रतिशत ककर दिया गया है।वहीं कनोला तेल पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से बढाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।सूर्यमुखी के कच्चे तेल पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से बढाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया जबकि रिफाइंड सूर्यमुखी तेल पर आयात शुल्क 35 प्रतिशत से बढाकर 45 प्रतिशत हो गया है।कच्चा मूंगफली तेल पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से बढाकर 35 प्रतिशत और रिफाइंड मूंगफली तेल पर आयात श्ìाल्क 35 प्रतिशत कर दिया गया है।इससे पहले केद्र सारकार ने मार्च में कच्चा पाम तेल पर आयात शुल्क 30 प्रतिशत से बढाकर 44 प्रतिशत और रिफाइंड पाम तेल के आयात पर शुल्क 40 प्रतिशत से बढाकर 54 प्रतिशत कर दिया था।उल्लेखनीय है कि भारत ने नवम्बर 2017 से लेकर अप्रैल 2018 तक छह महीने में लगभग 73.18 लाख टन वनस्पति तेल का आयात किया जा कि एक वर्ष पहले की समान अवधि के 73.13 लाख टन की तुलना में 2.5 प्रतिशत अधिक है।हालांकि 2017-18 (जुलाई-जून) फसल वर्ष की फसलों के तीसरे अग्रिम अनुमान के तहत देश में तिलहनों का कुल उपज 306.38 लाख टन थी जबकि 2016-17 में तिलहनों की कुल उत्पादन 312.76 लाख टन था।

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