दलहनों से लबालब गोदाम के बावजूद आयात की अनुमति

दलहनों से लबालब गोदाम के बावजूद आयात की अनुमति

खरीफ मौसम में दलहनों के बेहतर उत्पादन का अनुमान
 
हमारे संवाददाता
देश में दलहन उत्पादक किसानों की लागत नहीं निकल पा रही है और केद्र सरकार एक बार फिर विदेशों से दलहन मंगाने जा रही है।हालांकि इस वर्ष बेहतर मानसून के चलते दलहनों के अच्छे उत्पादन का अनुमान है।जिसके बावजूद विदेशों से निर्यात और आयात को लेकर संबंधित विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 11 जून 2018 को नई दिल्ली में बैठक हुई थी जिसमें देश भर के दाल मिल और कारोबारियों कासे दलहन आयात की मंजूरी दे दी गई।ऐसे में देश में दलहन से गोदाम पहले ही लबालब है फिर भी केद्र सरकार दलहनों का आयात क्यों कर रही जो कि समझ से परे प्रतीत हो रहा है।
दरअसल डीजीएफटी की अधिसूचना के तहत 31 अगस्त 2018 तक देश में 199891 टन अरहर,149964 टन मूंग और 149982 टन उड़द आयात हो जानी चाहिए जबकि देश की मंडियों में अरहर की दाल केद्र सरकार के तय न्यूनतम समर्थन मूल्य 5450 रुपए क्विंटल से कम पर बिक रही है।हालांकि कर्नाटक,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में दलहनों का अच्छा उत्पादन होता हे लेकिन पिछले कई वर्ष़ों से किसान परेशान है।जिसके तहत कर्नाटक को तो दाल का कटोरा कहा जाता है और वहां के किसानों ने अपनी अरहर 3000 रुपए से लेकर 4300 रुपए क्विंटल तक बेची है।जिसको लेकर ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के चेयरमैन श्री सुरेश अग्रवाल ने कहा कि 2015 के तहत देश भर में 173 लाख मीट्रिक टन दलहन का उत्पादन हुआ और उसी वर्ष कीमत में वृद्वि हुई।ऐसे में किसानों ने अगले वर्ष दलहनों की अच्छी बुआई की। जिससे 2016 में 221 लाख मीट्रिक टन यानि 48 लाख मीट्रिक टन अधिक दलहनों की पैदावार हुई और उसी वर्ष 57 लाख मीट्रिक टन दलहनों का आयात करना पड़ा।जिसके चलते दलहन की कीमत गिर गई जिससे किसानों की लागत नहीं निकल पाई।
उल्लेखनीय है कि भारत दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है।भारत में दुनिया की 85 प्रतिशत अरहर की खपत होती है।एक मोटे अनुमान के तहतज पूरी दुनिया में 49 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफ में अरहर की खेती की जाती है जिसमें से 42.2 लाख टन उपज होती है।इस उत्पादन में 30.7 लाख  टन का अनुमानित उत्पादन की हिस्सेदारी भारत की है।भारत में चना, उड़द, मटर, मसूर, मूंग सहित 14 किस्में की खेतर होती है।बहरहाल अरहर या
दूसरी दलहनें जब विदेश से मंगाई जाती है तो किसानों का गणित बिगड़ जाता है।जिससे न तो देश में एकाएक दलहनों की कमी होती है ओर न ही एकाएक कीमत आसमान पर पहुंचते है।जिससे आयात की नौबत आ जाए।ऐसे में किसानों
ने केद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि जब से मोदी सरकार आई है फसलों के दाम घट गए है।

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