रु. 10 करोड़ से कम के राइट्स इश्यू के लिए मंजूरी अनिवार्य नहीं

रु. 10 करोड़ से कम के राइट्स इश्यू के लिए मंजूरी अनिवार्य नहीं

सेबी के निदेशक बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण बदलावों को दी मंजूरी
 
आईपीओ और बायबैक को लेकर बदलेंगे नियम
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की तरफ से 21 जून 2018 को बोर्ड की बैठक में प्रारंभिक पब्लिक ऑफर (आईपीओ) सहित अधिग्रहण और शेयर बायबैक संबंधी नियमों में बदलाव की मंजूरी दे दी।जिसके तहत राइट्स इश्यू के मामले में ड्राफ्ट लूटर की अनिवार्यता की सीमा 50 लाख रुपए से बढाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है।इस बैठक में पब्लिक और राइट्स इश्यू के मामले में थर्ड पार्टी असाइनमेंट्स के नियमों में भी बदलाव सहित शेयर बाजारों के प्रमुखों की कार्यअवधि भी मय कर दी गई है।जिसके तहत आईपीओ के फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव करते हुए नियामक ने एमएसई आईपीओ को लेकर एंकर निवेशक की न्यूनतम निवेश राशि दो करोड़ रुपए तक कर दी है।
दरअसल स्टॉक मार्केट की तरह ही सेबी ने डिपोजिटरीज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन में भी घरेलू और विदेशी इकाइयों को लेकर निवेश की अधिकतम सीमा 15 प्रतिशत तय कर दी गई है।इसके साथ साथ शेयर बाजारों और मार्केट इंटरमीडियटरीज इंस्टीटय़ूशंस के प्रमुखों का पांच वर्ष़ों का अधिकतम दो कार्यकाल या अधिकतम 65 वर्ष तक सीमित कर दिया गया है।इसके अतिरिक्त सेबी ने नेशनल सेंटरन फॉर फाइनंशियल एजुकेशन (एनसीएफई) को कंपनीज एक्ट के तहत एक कंपनी के तौर पर मानयता देने का भी फैसला किया।जिसको लेकर सेबी की तरफ से कहा गया है कि वह एनसीएफई में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी 30 करोड़ रुपए मे खरीदेगा।सेबी की तरफ से कहा गया है कि यह सभी बदलाव शेयर बाजारों मे ंसूचीबद्व कंपनियों और उनके निवेशकों के हितों की रक्षा को लेकर आने वाले दिनों में अहम साबित होंगे।सेबी की तरफ से कहा गया है कि इश्यू ऑफ कैपिटल एण्ड डिस्कलोजर रिक्वायरमेंट्स (आइसीडीआर) के दिशानिर्देशों में बदलाव को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है।जिसको लेकर एक बयान में सेबी की तरफ से कहा गया है कि ओपन ऑफर के मामले में ऑफर प्राइस में संशोधन को लेकर समय सीमा टेंडरिंग प्रक्रिया शुरु होने से एक कार्यदिवस पहले तक बढाई गई है।जिसको लेकर सेबी की तरफ से कहा गया था कि यह सुधार मुख्य रुप से नियमों की भाषा के चलते होने वाली परेशानियां दूर करने,गैर जरुरी प्रावधान समाप्त करने और नियमों को कंपनीज एक्ट 2013 के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से किए गए है।जिसको लेकर सेबी के चेयरमैन श्री अजय त्यागी ने कहा कि बायबैक नियमों में बदलाव के तहत बायबैक अवधि की परिभाषा तय करने संबंधी प्रावधान भी शामिल रहेंगे।
हालांकि सेबी बोर्ड की तरफ से इस बैठ में जो प्रस्ताव मंजूर हुए है ।जिसमें आईपीओ के प्राइस बड की घोषणा पांच दिन के बदले दो दिन पहले ही की जा सकेगी।पब्लिक,राइट्स इश्यू को लेकर पांच वर्ष के बदले तीन वर्ष के फाइनेंशियल डिस्कलोजर की आवश्यकता होगी।ऑफर डाक्यूमेंट के फाइनेंशियल डिस्क्लोजर सिर्फ कंसोलिउटेड आधार पर होगा।ओपन ऑफर खुलने से एक कार्यदिवस पहले तक ऑफर प्राइस में सुधार की इजाजत होगी।थर्ड पार्टी असाइनमेंट मामले में सब ब्रोकर को लेकर कोई नया पंजीकरण स्वीकार नहे होगा।पंजीकृत सब ब्रोकर अधिकृत कारोबारी सदस्य के रुप में सूचीबद्व होंगे।मार्केट इंटरमीडिएटरीज के प्रमुखों का पांच पांच वर्ष़ों का दो कार्यकाल स्वीकृत होगा।

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