कृषि कार्य़ों में मनरेगा के उपयोग हेतु फैसला शीघ्र

कृषि कार्य़ों में मनरेगा के उपयोग हेतु फैसला शीघ्र

मनरेगा के उपयोग हेतु 7 मुख्यमंत्रियों का उप-समूह गठित 
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के कुछ कामों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के उपयोग को लेकर एक समन्वित नीतिगत रुपरेखा तैयार करने के लिए मुख्यमंत्रिमियों के उप समूह का गठन कर दिया है और उसे रिपोर्ट देने को लेकर 3 माह का समय दिया गया है।जिससे कि कृषि कार्य़ों में मनरेगा के उपयोग को लेकर स्पष्ट रुप रेखा निर्धारित किया जा सकेगा।जिससे कृषि की उत्पादकता बढाने में काफी मदद मिलेगी।जिससे देश का कृषि क्षेत्र में विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
दरअसल इसको लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्रियों के इस उपसमूह का संयोजक बनाया गया है और इसकी पहली बैठक अगले सप्ताह हो सकती है।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि इस उपसमूह में आन्ध्र प्रदेश,बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल और सिक्किम के मुख्यमंत्री बतौर सदस्य शामिल है।इसमें नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद भी शामिल है।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी ने किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है।चूंकि नीति आयोग की 17 जून 2018 को संचालन परिषद की चौथी बैठक में कृषि और मनरेगा के बीच तालमेल को लेकर समिति बनाने के लिए आम सहमति से निर्णय किया गया था। जिस बैठक के तहत किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर टिकाऊ संपत्ति सृजित करने को लेकर विशेष रुप से बोआई से पहले तथा कटाई के बाद के कार्य़ों सहित कृषि क्षेत्र में व्यापक रुप से मनरेगा के उपयोग पर जोर दिया गया था।जिसको लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को 7 मुख्यमंत्रियों का उपसमूह बनाने को लेकर मनोनीत किया था ताकि कृषि में मनरेगा के उपयोग को लेकर एक समन्वित नीतिगत रुरा अपनाया जा सकेगा।जिसके तहत यह उप समूह गठन की तारीख से 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा।इस इस उप समूह की बैठक अगले महीने होगी।ऐसे में यदि इस फैसले पर अमल हो जाता है तो कृषि क्षेत्र मे मजदूरों की कमी से जूझ रहे किसानों को एक सुनहरा सुअवसर प्राप्त होगा।जिससे एक तरफ कृषि क्षेत्र का व्यापक विकास होगा वहीं दूसरी तरफ कृषि क्षेत्र में गामीण मजदूरों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।जिससे स्वभाविक है कि देश के कृषि क्षेत्र सहित ग्रामीक्ष क्षेत्रों में किसानों और मजदूरों की दशा और दिशा में व्यापक सुधार हो सकेगा।

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