वैश्विक चीनी के भाव अधिक गिरने की संभावना कम

हमारे संवाददाता
भारत और थाइललøड में रिकॉर्ड चीनी उत्पादन की वजह से वैश्विक बाजार लगातार दूसरे साल भी बड़ी अधिशेष में रहेगी, ऐसा राबो बैंक ने अपनी दूसरी तिमाही के अपडेट में कहा है। वैश्विक बाजार में 2017-18 की मौसम के अंत में 105 लाख टन रो शुगर अधिशेष का अनुमान है। भारत और थाइललøड में गन्ना उत्पादन व्यापक ही नहीं असामान्य बढ़ कर आया है। पूरी दुनिया में कुल चीनी उत्पादन घटने की संभावना के बावजूद, मालबोज की वजह से 2018-19 की अधिशेष में 50 लाख टन वृद्धि होने की संभावना है। राबो बैंक ने 2018-19 का भारत का चीनी उत्पादन 355 लाख टन रहने का अनुमान किया है। जो 2017-18 के 340 लाख टन से अधिक है। लेकिन भारत में नए हाईब्रीड बीज की बुआई की वजह से इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 2017-18 का चीनी उत्पादन अनुमान 320 लाख टन रखा है। राबोबैंक ने थाईलेंड का 2018-19 वर्ष का उत्पादन, 2017-18 के 157 लाख टन से थोड़ा कम 145 लाख टन रहने का अनुमान रखा है। इसी प्रकार से यूरोपीय संघ में कोटा पद्धति के अमल के बाद 2018-19 का उत्पादन इस साल के 209 लाख टन से घटकर 200 लाख टन रखा है।
ब्राजील में इथेनोल के भाव जून आरंभ से अब तक 12 टका घाट ने के साथ वैश्विक बाजार में सुगर की सप्लाय फिर से चिंता का विषय बना है। बाजार में बड़ी सप्लाय को ठिकाने लगा ने के संघर्ष में मंगलवार को आईसीइ अमेरिकन रो सुगर अक्टूबर वायदा घट कर 11.54 सेंट प्रति पाउंड (454 ग्राम) हो गया था। शुक्रवार को जुलाई आईसीई रो शुगर वायदा कट होने के बाद भी अक्टूबर फ्रंट मंथ वायदा में कारोबार सीमित हुआ था। आईसीई फ्यूचर्स यूएस के डेटा से मालूम होता है कि ग्लोबल ट्रेडर कार्गिल आईएनसी की संयुक्त साहस कंपनी एल्विन ने कट हुए जुलाई वायदा में से 6519 लोट (3.31 लाख टन) की डिलीवरी उठाई थी। यह डिलीवरी ब्राजील, मेक्सिको और कोस्टारिका में से की जाएगी। 2014 के बाद की यह सबसे कम वायदा डिलीवरी है।
इस ओर भारत सरकार अक्टूबर 2018 से शुरू होती शुगर मौसम के लिए गन्ना एफआरपी (फेर एण्ड रेम्युनेरेटिव प्राइस) भाव, पिछली मौसम के प्रति क्विंटल 255 रुपए से बढ़ाकर 275 रुपए करने की दरखास्त पर सोच रही है। इसकी वजह से किसानों के गन्ना एरियर्स (शेष भुगतान) 22,000 करोड़ रुपए से बढ़ जाने का ड़र है। इकोनोमिक मामलों की कैबिनेट समिति इस बारे में बहुत जल्द निर्ण लेगी। इस्मा के मुताबिक 2017-18 में रिकॉर्ड उत्पादन होने के चलते जून के मध्य तक चीनी के भाव 25 से 30 प्रतिशत जितने गिर गए है। उनकी चिंता की एक वजह यह भी है कि प्रोत्साहक बारिश और अधिक गन्ना बुआई की वजह से अक्टूबर में शुरू होती 2018-19 की मौसम में भी रिकॉर्ड और ऐतिहासिक चीनी उत्पादन आएगा। इसकी वजह से संभव है कि भारतीय बाजार की स्थिति अधिक खराब हो सकती है। गन्ना के भुगतान में व्यापक घाटा होता है, इसलिए, 2019 की संसदीय चुनाव से पहले, अक्टूबर से चीनी मिल शुरू नहीं करने की चेताबनी चीनी मिलों ने दी है। सरकार ने जुलाई महीने का शुगर कोट जून के 21 लाख टन के सामने घटाकर 16.5 लाख टन जाहिर करने से चीनी के एक्स-मिल भाव में प्रति क्विंटल 330 रुपए का ऊछाल आया है। डीलरों का कहना है कि हाजिर बाजार में बड़ी मांग के सामने आपूर्ति कमी की वजह से भाव को समर्थन मिल गया है। 

© 2018 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer