उत्तर प्रदेश व पंजाब : खुले में पड़े गेहूं के भींगने की आशंका

केद्र ने राज्यों से भंडारण के बंदोबस्त के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली-केन्द व राज्य की एजेंसियों ने चालू रबी खरीद विपणन मौसम में गेहूं की भारी खरीद की है।जिसके तहत चालू रबी खरीद विपणन मौसम में कुल 3.5 करोड़ टन गेहूं की खरीद कर ली गइढ है।बहरहाल गेहूं की भारी मात्रा ही अब एक भारी मुसीबन बनने वाली है।चूंकि बरसात मौसम के चलते गेहूं के भींगने की आशंका बढ गई है।इस खतरे को भांपते हुए केद्र सरकार ने गेहूं खरीद करने वाले राज्यों से भंडारण के बंदोबस्त के बारे में विस्तृत रिपोर्ट
मांगी है।
दरअसल गेहूं की डिसेंट्रलाइज खरीद करने वाले राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश की सरकार की तरफ से राजनीतिक दबाबों और किसानों को लुभाने के लिहाज से चालू रबी खरीद विपणन मौसम में 50 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीदी कर ली है। इतने गेहूं को लेकर भंडारण की पर्याप्त सुविधा नहीं है।ऐसे में राज्य की राशन प्रणाली को लेकर राज्य की कुल 60 लाख टन गेहूं की जरुरत पड़ती है।जिसके हिसाब से यह मात्रा संतोषजनक है।बहरहाल राज्य में इतने भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के चलते गेहूं के भींगने की आशंका बढ गई है।वहीं पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने भी चालू रबी खरीद विपणन मौसम के तहत गेहूं की रिकार्डतोड़ खरीद कर डाली है।वहां से जिन बड़े राजयों में गेहूं की आपूर्ति होती रही है उनमें उत्तर प्रदेश प्रमुख है।जिसे फिलहाल गेहूं की जरुरत नहीं है।
ऐसे में पंजाब में भी खुले में रखा गेहूं भींग सकता है।वहीं मध्य प्रदेश में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के चलते चालू रबी खरीद विपणन मौसम में मध्य प्रदेश में गेहूं की पर्याप्त 85 लाख टन की खरीद हो चुकी है।वहां बाहर रखा चना तक भींग रहा है।ऐसे में गेहूं के भंडारण को लेकर बड़ी चुनौती सामने खड़ी है।राजस्थान में विधानसभा चुनाव नवम्बर में प्रस्तावित है।ऐसे में राजस्थान में चालू रबी खरीद विपणन मौसम में 15.50 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।इस समय राजस्थान में बारिश हो रही है।जिसके चलते राजस्थान में गेहूं के भंडारण की चुनौतियें का सामना करना पड़ रहा है। जिसको लेकर केद्रीय खाफ् मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों को पत्र लिखकर गेहूं भंडारण के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।जिसके तहत केद्रीय खाद्य मंत्रालय की तरफ से गेहूं भींगने की आशंका जताते हुए तत्काल भंडारण के इंतजाम का निर्देश दिया है।जिसको लेकर केद्रीय खाद्य मंत्रालय की तरफ से भारतीय खाद्य निगम को भी इस बारे में राज्यों को हर संभव मदद मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

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