महागठबंधन उलझन में

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने विपक्षी प्रचार और आक्रमण के सामने जवाबी कदम उठाने की शुरुआत की है। किसानों के लिए भारी राहत न्यूनतम खरीद भाव में भारी वृद्धि कर कृषि आक्रोश शांत करने का प्रयास किया है। भगोड़े विजय माल्या की संपत्ति के बारे में ब्रिटिश अदालत ने भारत सरकार के पक्ष में फैसला देकर मोदी विरोधी प्रचार का जवाब देने का मार्ग खोला है। संभव है कि नीरव मोदी के सामने भी सफलता मिले। इस बीच कांग्रेस और विपक्षी महागठबंधन उलझन में है तब लोकसभा के साथ राज्यों के चुनाव करने की संभावना ने विपक्ष-क्षेत्रीय पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है।
लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ कराने के बारे में चर्चा चल रही है लेकिन कुछ विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध क्यों कर रहा है? इस प्रस्ताव की चर्चा के लिए विधि आयोग द्वारा बुलाई गई विशेष बैठक का बहिष्कार हो रहा है। बहिष्कार और विरोध का एकमात्र कारण- है : प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के नाम पर एक साथ चुनाव होने पर उनके नाम पर राज्यों में भी भाजपा को लाभ मिलेगा। कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय पार्टियों को भी पसंद नहीं आएगा। लोकसभा का चुनाव 2019 के स्थान पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ देर-सबेर हो तो विपक्ष की आशा पर पानी फिर जाएगा। इस प्रस्ताव का विरोध करने वाली पार्टियों में कांग्रेस के अलावा मार्क्सवादी पार्टी के सीताराम येचुरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी का समावेश है। उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में है । गुजरात, कर्नाटक के बाद कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों का उत्साह बढ़ा था कि अब नरेद्र मोदी को हटाया जा सकेगा। इसके लिए महागठबंधन की तैयारी भी हो रही है। किसान आंदोलन, व्यापारी वर्ग की नाराजगी, मुस्लिम और दलित वर्ग का विरोध- ये सभी संयोग भाजपा के लिए प्रतिकूल है और चुनाव के लिए नकारात्मक है उसके बावजूद कांग्रेस का मानना है कि एक साथ चुनाव होने पर नरेद्र मोदी के नाम पर भाजपा को वोट और सत्ता मिलेगी अर्थात नरेद्र मोदी की लोकप्रियता घटने का विश्वास नहीं है। कांग्रेस को तो विश्वास है कि लोकसभा के साथ-साथ यथासंभव उतने राज्यों का चुनाव होगा। विशेष रूप से महाराष्ट्र, उड़ीसा तथा बिहार की संभावना है। महाराष्ट्र में तो सबसे अधिक संभावना है। भाजपा का मुख्यमंत्री होने से- और बहुमत साबित होने से राज्यपाल को त्यागपत्र देकर लोकसभा के साथ चुनाव की सिफारिश की जाएगी। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने 50-50 प्र. श. सीटों पर लड़ने का समझौता कर लिया है।
इस समय प्रधानमंत्री चाहें तो लोकसभा के साथ 5-6 राज्यों का चुनाव आसानी से कराया जा सकेगा। इससे लिए संसद की मंजूरी जरूरी नहीं है, क्योंकि चुनाव का समय आ गया है। लोकसभा के चुनाव के बाद केद्र सरकार संविधान में जरूरी सुधार करा सकती है। इस समय सेम्पल- प्रायोगिक- समझ मिलेगी।
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देशभर में इस समय समूह द्वारा हत्या का `दौर' चल रहा है। इस उपद्रव के फैलाव के लिए मोबाइल पर दावानल की तरह फैलती अफवाहें जिम्मेदार है । अफवाहों को `जाली- बनावटी समाचार' का नाम दिया जाता है। हकीकत में विज्ञान और विकास का यह बड़े से बड़ा दुरुपयोग है : अब उसे नियंत्रण में लेने का प्रयास हो रहा है वह सफल होगा? राज्यों और शासन के समक्ष यह एक गंभीर चुनौती है।
हमारे देश में कृषि क्षेत्र- पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग और दूसरी ओर किसानों की आत्महत्या की समस्या गंभीर है और लोकतंत्र में उसका असर राजनीति पर पड़ना स्वाभाविक है। नरेद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह चुनौती गंभीर बनी है। उन्होंने किसानों को उत्पादन खर्च से 150 प्र. श. अधिक प्रतिफल देने का वचन दिया था। उसका अमल अब शुरू हो रहा है। विपक्ष का कहना है : चुनाव को नजर में रखकर यह निर्णय लिया गया है- लेकिन यह तो वास्तविकता है। हर सरकार ने इस तरह से निर्णय लिया ही है। प्रश्न मात्र इतना ही है कि इस निर्णय से किसानों को पूरा लाभ मिलेगा? और प्रधानमंत्री को राजनीतिक लाभ मिलेगा? 
पिछले दो दशक के दौरान- जो सरकारें आई और गई उन्होंने ग्राहकों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया है। औद्योगिक कामगारों के संगठित होने से उनकी मांगे स्वीकार की जाती है । अब उत्पादकों के हित में और कदम उठाए जाएं तो उनका स्वागत करना चाहिए। लेकिन जो नया न्यूनतम खरीद भाव घोषित हुआ है उसके आधार पर सरकार खरीदी करेगी?उत्पादन बम्पर होने और भाव के टूटने पर इस न्यूनतम भाव पर खरीदी करने के लिए सरकार बंधी है। इस तरह सरकार की आश्वासन की कसौटी भाव की घोषणा में नहीं, खरीदी में होगी। दूसरे इन खाद्यानों के निर्यात पर असर पड़े तो जगह-जगह माल जमा होगा तब पर्याप्त गोदामों की व्यवस्था जरूरी होगी। 
इस समय तो किसान असंतोष और आंदोलनों का राजनीतिक लाभ लेने की विपक्ष की आशा पर पानी फिरता हुआ दिख रहा है।                 
 

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