भिवंडी के विवरों व ट्रेडरों में खुशी की लहर

भिवंडी के विवरों व ट्रेडरों में खुशी की लहर
50 किलोमीटर की सीमा : महाराष्ट्र में अब ई-वे बिल जरूरी नहीं
गणपत भंसाली
सूरत। महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य में जॉब वर्क हेतु आदान-प्रदान किये जा रहे माल-सामान की 50 किलोमीटर की सीमा में ई-वे बिल की अनिवार्यता खत्म कर दिए जाने से भिवंडी के पॉवरलूम इकाई धारकों, साइजरों प्रोसेस हाउसों तथा ग्रे एवं प्रोसेस कपड़ा ट्रेडरों ने राज्य सरकार के फैसले का स्वागत कर खुशी का इजहार किया हैं, टेक्सटाइल्स उद्योग आघाडी भिवंडी के संयोजक राकेश ओस्तवाल ने इस कदम का स्वागत करते हुए बताया कि जाब वर्क हेतु कपड़ा व यार्न आदि आदान-प्रदान करने से व्यापारियों, विवरों साइजिंग व वारपिंग इकाई धारकों तथा कपड़ा प्रोसेसरों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता था, ओस्तवाल ने बताया कि कपड़ा उद्योग से जुड़ी तमाम तरह की इकाइयां अलग-अलग विस्तारों में विद्यमान है, यार्न से कपड़ा प्रोसेस होने की प्रक्रिया में जाब हेतु भिन्न-भिन्न ठिकानों पर कच्चा माल लाया व लेजाया जाता हैं, सर्व प्रथम यार्न को वारपिंग, वीविंग के पश्चात फिनिशिंग, प्रिंटिंग व वेल्यु एडिशन जैसे विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता हैं, अत: इस हेतु एक कोने से दूसरे कोने तक लाया-ले जाया जाता हैं, उल्लेखनीय हैं कि जीएसटी प्रावधानों के तहत ई-वे बिल प्रणाली लागू होने से ही भिवंडी के वीवर्स, प्रोसेसर्स व ट्रेडर्स आदि इसका पुरजोर विरोध करते आ रहे हैं, इस मांग को लेकर गत 8 जून को अनेक विवरों व ग्रे कपड़ा व्यवसायियों ने सांसद कपिल पाटिल के माध्यम से रतिलाल सामरिया, पुष्पराज डांगरा, ललित पोरवाल, अंकित संकलेचा, भंवरलाल पालरेचा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से मुलाकात कर उन्हें ई-वे बिल 50 किलो मीटर की सीमा में खत्म करने हेतु एक ज्ञापन दिया था, ये उल्लेखनीय हैं संसद  कपिल पाटिल के आग्रह पर ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने इस हेतु तत्काल मीटिंग बुलाई और उद्योग-व्यापार के हित में यह निर्णय लिया गया कि भिवंडी भारत का टेक्सटाइल्स वीविंग का बहुत बड़ा हब हैं जहां तकरीबन 10 लाख लूम्स पर सिंथेटिक रोटो, वूली, विस्कॉस, स्पन, केम्ब्रिक्स, मलमल, वॉयल आदि सैकड़ों क्वालिटियों का ग्रे कपड़ा उत्पादित होता है, तथा यहां सर्वाधिक इकाइयां उत्पादन इकाइयां लघु स्तर की हैं, भारत मे कपड़ा उत्पादन में 21 प्रतिशत योगदान भिवंडी तथा आस-पास विस्तार का है, सूरत के कपड़ा बाजार में भिवंडी से बहुत बड़े पैमाने पर ग्रे कपड़ा आता हैं, भिवंडी से पाली, बालोतरा, जसोल, जोधपुर आदि केंद्रों के लिए ग्रे कपड़े की चलानी होती हैं।

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