सोयाबीन कांप्लेक्स में तेजी या मंदी की बड़ी पोजिशन होल्ड करना जोखिम

सोयाबीन कांप्लेक्स में तेजी या मंदी की बड़ी पोजिशन होल्ड करना जोखिम
अमेरिका से आयातित सोयाबीन और अन्य सामान पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क का अमल चीन में 6 जुलाई से
हमारे संवाददाता 
सोयाबीन कांप्लेक्स में तेजी या मंदी की बड़ी पोजिशन होल्ड करनी हाल में जोखिम भरी है। चीन और अमेरिका के बीच के टैरिफ युद्ध के मामले में समाधान की संभावना को ठुकरा नहीं सकते। एक महीने पूर्व दोनों देशों ने खुलेआम कहा था कि अमेरिका से कृषि उत्पादनों की निर्यात में सार्थक वृद्धि हुई है। चीन ने नई घोषणा में कह दिया है कि वह अमेरिका से आयात होते सोयाबीन और अन्य सामान पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क का अमल 6 जुलाई से करेगा। यह भी तय है कि हाल के संजोग में चीन भी अमेरिकी सोयाबीन के बीना रह सके ऐसा नहीं है। चीन ने आने वाले सालों में 1,000 लाख टन सोयाबीन की आयात करनी होगी, जो अपनी पशुचारा की मांग की तुलना में ब्राजिल की खुद की आपूर्ति से बहुत अधिक है। 
29 जून को अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने मक्का और सोयाबीन बोआई के आंकड़ों क्रमश: 891 लाख एकड़ और 896 लाख एकड़ जाहिर किया। जो पिछले साल की तुलना में एक प्रतिशत कम है। 1983 के बाद की यह पहली घटना है, जिसमें अमेरिका ने मक्का की तुलना में सोयाबीन में अधिक बुवाई की थी। अमेरिकी सोयाबीन स्टॉक 1.22 अरब बुशेल (प्रत्येक 27.216 किलो), पिछले साल की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक होने का अनुमानित है। पिछले साल अमेरिका ने 360 लाख टन सोयाबीन चीन को बेचा था। शुक्रवार को सीबीओटी सोयाबीन अगस्त वायदा लगातार पांचवें सप्ताह घटकर 8.67 डॉलर प्रति बुशेल हुआ था, जून में भाव में 13 प्रतिशत की गिरावट आई है, पिछले चार साल में यह सबसे बड़ी मासिक भाव गिरावट है। 
यदि टैरिफ योजाना का अमल होगा तब निर्यात में भारी कमी आने की संभावना अमेरिकी सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल देख रही है। यह कमी को यूरोप, मेक्सिको और अन्य साउथ ईस्ट एशियाइ देशों में निर्यात बढ़ाकर ऑफसेट कर सकेंगे, जिन्होंने अपने पशुधन चारा की सुरक्षा करने के लिए नए शुल्क स्ट्रक्चर में सोयाबीन को शामिल नहीं किया है। राबो बैंक का कहना है कि यदि ट्रेड वॉर का अमल होता है तब चौथी तिमाही तक चीन, अमेरिका की 40 लाख टन सोयाबीन खरीददारी ब्राजिल में शिफ्ट कर देंगे। चीन अपने सोयाबीन आवश्यक्ता को कनौला (रायडा) जैसे कई वैकल्पिक उत्पादन आयात का भी सोच रहे है। चीन और अमेरिका के बीच यह लड़ाई का लाभ कनाड़ा के कनौला उद्योग को भी होने वाला है। 
इस विवाद ने विश्व के सबसे बड़े निर्यातक ब्राजिल के सोयाबीन में बड़ी तेजी लाई है। इसकी वजह से यूरोपीय संघ के प्रोसेसरों को आपूर्ति हांसिल करने के लिए अन्य जगह पर नज़र ड़ालने के लिए मजबूर किया है। इसका दूसरा मतलब यह होता है के 28 देशों के यूरोपीय ब्लोक में ब्राजिल जो सबसे बड़े निर्यातक है, उसका स्थान अमेरिका ले लेगा। चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की अवहेलना करने वाले ब्राजिल और अमेरिका के एफओबी सोयाबीन भाव के बीच नए फसल की डिलिवरी का प्रति टन 50 डॉलर का भाव अंतर हो गया है। 
पिछले सप्ताह ब्राजिल में सितंबर डिलीवरी शर्त का एक कार्गो सोयाबीन नवंबर वायदा के सामने 197 सेंट प्रति बुशेल (प्रति टन 398 डॉलर एफओबी) प्रीमियम से बुक होने का सूत्रों ने बताया था। एक भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी के सूत्र ने कहा कि अमेरिकी गल्फ में सितंबर सोयाबीन का सौदा नवंबर वायदा के सामने 60 से 76 सेंट (प्रति टन 349 डॉलर) के प्रीमियम से बेचा जाता है, इस तरह ब्राजिल अमेरिका के बीच का भाव अंतर 49 डॉलर का है। चीन ने इससे पहले पेसिफिक नोर्थवेस्ट डिलिवरी शर्त से बुक किए कई अमेरिकी कार्गो रद्द होने से भाव अंतर का विस्तारण होने लगा है। अमेरिकी कृषि मंत्रालय के पूर्वानुमान के मुताबिक वर्तमान वर्ष में चीन के 13.3 लाख टन (20 से 22 कार्गो) और आनेवाले साल के 14.5 लाख टन के सौदे अभी भी खड़े है।

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