सोने में बड़ी तेजी न होने तक चांदी में तेजी की संभावना कम

सोने में बड़ी तेजी न होने तक चांदी में तेजी की संभावना कम
गोल्ड-सिल्वर रेशियो 1:78.25 को देखेंगे तो सोने के भाव की तुलना में चांदी का भाव तेजी से बढ़ना चाहिए
इब्राहिम पटेल 
वैश्विक व्यापार में बढ़ रहे तनाव और उसकी वजह से बढ़ी अमेरिकी डॉलर की मांग ने चांदी की मौजूदा चाल को काफी नाजुक बना दिया है। चीन ने अरबों डॉलर की टैरिफ लागू करने की प्रत्याघाती हमले की चेतावनी देने के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प शुक्रवार से अमल में आए उस तरह चीन के मालों की आयात पर 34 अरब डॉलर का शुल्क लागु करने के लिए उत्सुक है। निवेशक भी यूएस फेड की जून बैठक की मीटिंग पर ध्यान केंद्रित करके बैठे है।
अगले महीनों और वर्ष़ों में चांदी, तेजी या मंदी में जाएगी उसका निर्धारण अब समयबद्ध और कठिन हो चूका है। 1980 के दशक में सर्जित हुई ऐसी ही स्थिति इंगित करती है कि चांदी या तो मंदी की नई सायकल का निर्माण करेगी या तेजी की चाल का प्रारंभ करेगी। फंडामेंटल व्यूह पॉइंट से देखेंगे तब चांदी में अभी गैर मार्केट सिनारियों का अवरोध करने वाले कंई फंडामेंटल अस्तित्व में हैं। यदि 1980 के दशक की स्थिति को आज के ब्याज दर के सामने रखकर देखेंगे तब आर्थिक स्थिति एकदम अलग है, या लोगों के पास निवेश लायक फंड का अभाव या डेट आधारित एसेट्स में निवेश करने की क्षमता के बीच आसमान-जमीन का अंतर है। यदि आप ब्याज दर और चांदी के भाव के बीच के संबंध को बराबर पहचानते हो तब आप समझ सकते हैं कि हाल के संयोग में चांदी में तेजी होनी संभव है।
यदि हम गोल्ड-सिल्वर रेशियो 1:78.25 को देखेंगे तब वह भी दर्शाता है कि अगले सालों में सोने के भाव की तुलना में चांदी के भाव गति से बढ़ने चाहिए। लेकिन कुछ बुलियन गुरुओं के द्वारा जारी किए गए सोने के मौजूदा फंडामेंटल्स और माहितीओं हवा में फायरिंग करने के समान है और इसी ही वजह से चांदी में होनी चाहिए वैसी तेजी का मार्ग खुला नहीं है। तो फिर यहां यह सवाल होना लाजमी है कि पिछले 80 सालों में सोने की तेजी की गैरमौजूदगी में भी चांदी में तेजी कब देखने को मिली थी? तो उसका जवाब है, पिछले 80 सालों में ऐसा नसीब से ही बना है। ऐसी एक तेजी की घटना 1997 की तिसरी तिमाही में देखने को मिली थी, जब सोना में तेजी नहीं होने के बावजूद चांदी में छह महीने तक तेजी चली थी। 
आपको याद होगा कि वोरेन बफेट ने बाजार में से हाजिर चांदी कोर्नर करना शुरू करने के साथ कृत्रिम भाव खिंचने की प्रतिस्पर्धा शुरू की थी और उसके सीधे परिणामस्वरूप चांदी में तेजी का प्रारंभ हुआ था। उस समय चांदी में तेजी होने के लिए कोई फंडामेंटल वजह नहीं थी, लेकिन पंडितों ने तब चांदी की उस तेजी को सोने के साथ जोड़ने का प्रयास करते थे। ऐसा कह सकते हø की  जब तक सोना में बड़ी तेजी नहीं होगी तब तक चांदी में व्यापक तेजी संभावित नहीं है।
लगातार बिकवाली के कारण का अनुभव करती चांदी में सोमवार को भाव सात महीने के तल 15.83 डॉलर हुए थे, जो बुधवार को बढ़कर 16.04 डॉलर रहा था। पिछले सप्ताह चांदी के तेजौड़ियों ने अपना सट्टाकीय लेण बड़े पैमाने पे रख दिया था। अमेरिकी वायदा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 26 जून को चांदी वायदा के बड़े सट्टोरियों और हेज फंडों ने खड़े रखे कुल नोन-कमर्शियल कांट्रैक्ट 34221 है। 
बाजार अभी मंदड़ियों की मजबूत पकड़ में है और उनको टेक्निकल एडवांटेज भी है। तेजड़ियों के लिए अब के बाद का लक्ष्य 16.50 डॉलर के मजबूत टेक्निकल रेसिस्टेंस को पार करना है। जब मंदड़ियों के लिए 15.50 डॉलर के प्रथम सपोर्ट को तोड़ने का और उस स्तर के नीचे भाव बंद करने का हेतु रहेगा। प्रथम रेसिस्टेंस सोमवार को इंट्रा-डे अप 16.18 डॉलर और उसके बाद 16.25 डॉलर का है, जबकि अब के बाद का सपोर्ट इस सप्ताह की बॉटम 15.79 डॉलर और उसके बाद 15.75 डॉलर का है।

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