दाल-दलहनों में आंशिक तेजी : चने में सट्टागत तेजी

हमारे संवाददाता 
स्थानीय संयोगिता गंज थोक मंडी मे सट्टा बाजार की चालों पर आवा-जाही घटती-बढ़ती हो रही है । गत् दिनों सरकार का एजेंडा एमएसपी क्या बढ़ा इससे कुछ दाल-दलहनें में आंशिक काल की तेजी हुई तो किसी में मंदी आ गई ।  विगत् हप्ते इसके प्रभाव से मूंग और उड़द में तेजी हुई थी बाद में कुछ मामूली मंदी हुई । इसी प्रकार चना स्टाकिस्टो के पास से निकल गया है मगर सरकार के खजाने में रखा होने और ऊंचे भाव पर निकलने की तैयारी में हवा से ही चना के भाव गत् लगभग 100 रु. की तेजी 4250 से 4350 रु. थोक में बना गये ।  इन दलहनों पर इनक परवर्ती उत्पाद अर्थात दालों में और चने का बेसन पर भी प्रभाव होना देखा गया है । छोटे व्यापारियों के अनुसार वायदा बाजर के चलने के पूर्व  देश में  भाव पर तेजी-मंदी का अतिरेक कोई वर्ष भर में एक या दो बार होता था । अगर तेजी होती भी तो उत्पादन अनुसार भाव गिर जाया करते थे । उनके अनुसार अब तो अधिक उत्पादन अधिक सट्टाै व्यापार बन गया है ।  प्याज का उदाहरण हाल-फिलहाल ताजा है । देश में अधिक उत्पादन प्याज का क्या हुआ जनता की मुसीबत बढ़ गई । 5 रु. किलो पर मिलने वाला प्याज 20-30 रु. किलो क्वालिटी अनुसार भाव हो गये । इसके पीछे सीध स्टाकिस्टो का हाथ बताया जा रहा है । इन्होंने सरकारी प्याज और किसानों से बड़े सस्ते में खरीदा और सट्टे की घुरी चलाकर 20-30 रु. किलो तक भाव करवा दिया । भारी मुनाफा कमाई इन स्टाकिस्ट व्यापारियों की हो गई  ।
बहरहाल एक बार फिर चना 2700-2925 रु. उंचे स्तर तक नीचे में आया था जो कि धीरे धीरे गत हप्ते बढ़ते क्रम से  गुरुवार की शाम तक चना कांटा  3440 रु. तक  तेजी में होना बोला जा रहा था । कारण कि सरकार द्वारा भावों को कृषको हेतु सम्हालना बताया जा रहा है । उधर सरकार की नीति कृषको को भाव मिलने की है और दूसरी तरफ ऊंचे भाव पर निवेशक आगे नहीं आ रहे बताए जा रहे है । सरकार का एमएसपी से नीचे खरीदी गई कोई भी व्यवहार पर सजा की चेतावनी भी असर कर रही है । इससे खरददार भी हाल-फिलहाल चूजी बने हुऐ है बताऐ जा रहे है । आगे तेल-देखो - और तेल- की -धार - देखे की नीति पर है । थोक मंडी में  काबुली चना 3000 बोरी, चना 500 बोरी, तथा सोयाबीन 2000 , सरसों 20 से 25  के लगभग बोरियों के साथ ही अन्य दलहनो की भी आवके हो रही है  ।  पिछले वर्ष हालांकि चने की बंपर पैदावार हुई है । आयात भी भारी हुआ है । इस वर्ष भी हाल-फिलहाल के मौसम से खरीफ फसल के अच्छे आने के आसार है । चने में हुई  तेजी के असर से  चना दाल भी  10 रु. थोक  में तेज होकर  5400 से  5600 रु. रही और बेसन भी उछलकर 2800 से 3000 रु. तक हुआ बताते है ।  बेसन के अधिक तेज होने के पीछे पीले चने के आयात पर कंटोल होने के भी बाते है ।  कर्नाटक तरफ के नये मूंग के साथ ही स्थानीय की आवके बढ़ने  के बावजूद मूंग मे विगत् हप्ते के मुकाबले तेजी काहोना बताया जा रहा है भाव 4500 से 5100  रु. तक  में होना बताया जा रहा था । व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार देशी उड़द के साथ साथ आयातित उड़द का अधिक स्टॉक हो जाने तथा व्यापारिक मांग के कमजोर रहने से उड़द में उपरी भाव पर स्थिरता रही है ।  भाव 2800 - 3600 रु. तक होना बताए गये । मसूर में तेजी रही मगर ऊंचे भाव पर मांग  कमजोर रहने  के बावजूद मनोवृत्ति तेजी नहीं होना  बताई गई। भाव 4050 से 3950 रु. क्वालिटी अनुसार रही । दाल मिलें की मांग में स्थिरता रही । इससे तुवॉर और उपरी भाव पर स्थिर रहे है । तुवॉर का भाव 3650 से 3750 रु. बताया गया और महाराष्ट्र तुवॉर का भाव 4100 रु. और म.प्र. तुवॉर का भाव 3750 रु. बताया गया है ।  जबकि इन भाव पर सभी दालों में कामकाज कमजोर चल रहा है । तुवॉर दाल फूल 5900 से 6300 रु. मार्केवाली 6300 रु., मूंग दाल 5500 से 5600 रु. बोल्ड में 5700 रु. तक थी, उड़द दाल 4200-4500 रु., मोगर 6800 -7000 रु. भाव क्वालिटी अनुसार बताये गये 

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