91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तरें में 8% की वृद्वि

गुजरात और महाराष्ट्र में एक दशक के जल संग्रहण स्थिति संतोषजनक
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । इस बार मानसून मौसम में अब तक देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 52.355 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ।यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 32 प्रतिशत है।जबकि 12 जुलाई 2018 को समाप्त सप्ताह में जल संग्रह 24 प्रतिशत के स्तर पर था।ऐसे में 19 जुलाई 2018 को समाप्त में यह जल संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 125 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्ष़ों के औसज जल संग्रहण का 116 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.933 बीसीएम है जो कि समग्र रुप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे है जो कि 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते है।
दरअसल केद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की तरफ से 19 जुलाई 2018 के समाप्त सप्ताह तक के आंकड़े प्रस्तुत किए गए है।जिसको लेकर क्षेत्रवार जल संग्रहण स्थिति के बारे में इस कॉलम में उल्लेख किया जा रहा है। जिसके तहत देश के उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश,पंजाब तथा राजस्थान आते है।इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल जल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय है जो कि केद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी में है।इन जलाशयों में कुल उपलब्ध जल संग्रहण 3.66 बीसीएम है जो कि इन जलाशयों की कुल जल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है।पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 43 प्रािस्ता थी।जबकि पिछले दस वर्ष़ों का औसत जल संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल जल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत था।इस तरह से पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में जल संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्ष़ों की इसी अवधि के तहत औसत जल संग्रहण से भी कम है।वहीं देश के पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, उड़ीसा,पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते है।इस क्षेत्र में 18.33 बीसीएम की कुल जल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय है जो कि सीडब्ल्यूसी की निगरानी में है।इन जलाशयों में कुल उपलब्ध जल संग्रहण 4.23 बीसीएम हे जो कि इन जलाशयों की कुल जल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत है।पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की जल संग्रहण स्थिति 24 प्रतिशत थी।जबकि पिछले दस वर्ष़ों का औसत जल संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल जल संग्रहण का 23 प्रतिशत था।इस तरह से पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में जल संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्ष़ों की इसी अवधि के तहत औसत जल संग्रहण से भी कम है।उधर देश के पश्चिम क्षेत्र में गुजरात और महाराष्ट्र आते है।इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम को कुल जल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय है जो कि सीडब्ल्यूसी की निगरानी में है।
इन जलाशयों में कुल उपलब्ध जल संग्रहण 7.89 बीसीएम है जो कि इन जलाशयों की कुल जल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है।पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की जल संग्रहण स्थिति 26 प्रतिशत थी।इस तरह से पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में जल संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्ष़ों की इसी अवधि के तहत औसत जल संग्रह से बेहतर है।वहीं देश के दक्षिण क्षेत्र में आन्ध्र प्रदेश,तेलगांना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं),कर्नाटक,केरल एवं तमिलनाडु आते है ।इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल जल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय है जो कि सीडब्ल्यूसी की निगरानी में है । 

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