आयातित फैब्रिक्स की 45 किस्मों पर इम्पोर्ट डय़ूटी 20 प्रतिशत

आयातित फैब्रिक्स की 45 किस्मों पर इम्पोर्ट डय़ूटी 20 प्रतिशत
विवर्स, ट्रेडर्स, प्रोसेसर्स सभी ने सरकार के निर्णय का किया स्वागत
 
देश का आर्ट सिल्क कपड़ा उद्योग चीन, वियतनाम, ताइवान आदि देशों से आयातित  मैंन मैड फायबर आधारित फैब्रिक्स से परेशान हैं, चीन आदि देशों से डंप हो रहे ये कपड़े भारत से काफी सस्ते हैं, कारण वहां टेक्सटाइल्स उद्योग को अत्यंत ही मुनासिब दरों से विद्युत आपूर्ति होती हैं व बहुत ही कम ब्याज दरों पर पूंजी उपलब्ध हो जाती हैं, तथा अधिकतया भारतीय उद्यमी चाइना आदि देशों से बनी टेक्सटाइल्स मशीनों पर अपना उत्पादन ले रहे हैं, अत: चीन की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्रीज के आगे भारतीय टेक्सटाइल्स इंडस्ट्रीज  का टिक पाना अत्यंत ही जटिल काम है, इन हालातों में पिछले कई सालों से सूरत, मुम्बई, भीलवाड़ा आदि शहरों के टेक्सटाइल्स से जुड़े उद्यमी सरकार के आगे गुहार लगा रहे हैं कि चीन आदि देशों से आयातित आर्ट सिल्क फैब्रिक्स पर एंटी डंपिंग डय़ूटी लागू की जाएं। उल्लेखनीय हैं कि कपड़ा मंत्री स्मृनी ईरानी जब-जब सूरत आई हैं तब-तब विवरों आदि व विभिन्न एसोसिएशनों द्वारा आयातित फैब्रिक्स पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने हेतु ध्यान आकर्षित कराया हैं, तथा कपड़ा मंत्री ने हर बार व्यापारियों को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे पर चिंतन कर रही हैं, बहरहाल देर आयद दुरस्त आयद की तर्ज पर सरकार के कान पर जूं रेंगी तथा उसकी सुनवाई कर कदम उठाया, प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग द्वारा एक अधिसूचना जारी कर आर्ट सिल्क आधारित कुल 45 फैब्रिक्स किस्मों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 20 प्रतिशत करने का आदेश दिया हैं, आयातित कपड़े की किस्मों में वूवन फैब्रिक्स, डाइड वूमेन फैब्रिक्स, सिंथेटिक फिलामेंट यार्न उत्पादित किस्में, टेक्सटाइल्स क्लॉक एंव मिलनेप्स, नॉन वूवन कोकड, 70 व 150 ग्राम की किस्में, कार्पेट, वूल कार्पेट व  वूल तथा ओरिजनल हेर कार्पेट पर ड्यूटी 10 से बढ़ा कर 20 प्रतिशत की गई हैं, सरकार के इस निर्णय से जहां सूरत, मुम्बई आदि के मेनमेड फायबर आधारित फैब्रिक्स उद्योग को फायदा होगा वहीं भीलवाड़ा के उद्यमियों को भी काफी राहत पहुंचेगी, सिंथेटिक, रेयान टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन कॉउंसिल (एस आर टी ई पी सी) के सयुंक्त निदेशक श्री के बरुआ के अनुसार चेप्टर 540752 के अंतर्गत पोलियस्टर डाइड यार्न आधारित किस्मों साड़ी, शूटिंग-शर्टिंग जैसी वैरायटियों पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से स्थानीय उद्योग को राहत पहुंचेगी, उल्लेखनीय हैं कि वर्तमान की इम्पोर्ट ड्यूटी के तहत चाइना उत्पादित साड़ियों का कपड़ा आयात कर जो साड़ियां बेची जाती हैं व प्रति नग 10 से 12 रु में कम में बिक रही हैं,अब इम्पोर्ट ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 20 प्रतिशत कर दिए जाने से सूरत की साड़ी एंव लेडीज ड्रेस मटीरियल्स तथा शर्टिंग उद्योग व मुम्बई में बड़े पैमाने पर फैले मीडियम व फैंसी शर्टिंग तथा भीलवाड़ा का शूटिंग उद्योग व देश के विभिन्न कपड़ा उत्पादक केंद्रों में कर्टन आदि उत्पादक लाभांवित हो पायेगा,फ़ियासवी के चेयरमेन भरतभाई गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा हैं कि सरकार के इस निर्णय से 6,50 लाख वीवर्स, 400 प्रोसेसिंग इकाइयां तथा 40 हजार से ज्यादा कपड़ा ट्रेडर्स लाभान्वित होंगे, जो नोटिफिकेशन जारी हुआ हैं उसमें चीन आदि देशों से आयात होने वाले 45 फैब्रिक्स किस्मों पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 20 प्रतिशत किए जाने का उल्लेख हैं, जबकि फ्री ट्रेड करार के अंतर्गत वियतनाम, बांग्लादेश जैसे देशों से आयात होने वाले फैब्रिक्स पर आयात ड्यूटी लागू करने सम्बन्धी कोई उल्लेख नही हैं, सूत्रों के अनुसार वियतनाम से आयातित सस्ते कपड़े की बदौलत सूरत का कपड़ा उद्योग प्रभावित हैं। यह उल्लेखनीय हैं कि जुलाई 2017 से पूर्व जब जीएसटी लागू नहीं हो पाया था, तब  कस्टम सेस 10,72 प्रतिशत व सीवीडी 12,5 व उस पर 4 प्रतिशत आदि मिला कर कुल 29,44 प्रतिशत ड्यूटी देय थी,जी एस टी लागू होने के बाद कुल ड्यूटी 16,26 होती , लेकिन आ टी सी रिफंड 5,54 मिलने के बाद आयातित कपड़े पर कुल ड्यूटी 10,72 प्रतिशत ही लागू थी, जबकि दुसरीं और विवर को यार्न पर 12 प्रतिशत तथा कपड़े पर मात्र 5 प्रतिशत चुकाने की स्थिति में भारतीय फैब्रिक्स पर आयातित के मुकाबले में काफी ज्यादा ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, सरकार द्वारा जारी किए गए इस नोटिफिकेशन से विवरों, उत्पादकों व ट्रेडरों में एक आस जगी हैं। सरकार के इस निर्णय पकाात फेडरेशन ऑफ टेक्सटाइल्स ट्रेडर्स एसोसिएशन ( फोस्टा) के मंत्री श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि सरकार द्वारा चाइना से आयातित फैब्रिक्स पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत करने से अलबत्ता राहत मिलेगी, लेकिन जीएसटी से जुड़े अनेक मुद्दों का निराकरण करना जरूरी हैं, इस सम्बंध में पांडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के मंत्री श्री आशीष गुजराती ने कहा कि सरकार द्वारा आयात ड्यूटी 10 से बढ़ाकर 20 कर दिए जाने से  आयातित कपड़े का डंपिंग कम होगा व घरेलू उत्पादकों को राहत मिलेगी, साउथ गुजरात  टेक्सटाइल्स प्रोसर्स एसोसिएशन के जितुभाई वखारिया ने भी सरकार के इस निर्णय को सराहा हैं,उन्होंने कहा कि इसका असर आयात होने वाले रेडीमेड गारमेंट पर भी पड़ेगा, इससे घरेलू उद्योग को राहत मिल जावेगी, एस आर टी ई पी सी के रीजनल चेयरमेन धीरूभाई शाह ने कहा कि सरकार द्वारा आयात ड्यूटी बढ़ाने से भारतीय रेडीमेड गारमेंट उद्योग पनपेगा व वीविंग, निटिंग तथा प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज को इसका लाभ मिल पायेगा। आयातित फेब्रिक्स डम्प कम होने से डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज को इसका फायदा मिलेगा, धीरूभाई ने वित्तमंत्री तथा अधिकारियों का इस निर्णय हेतु आभार प्रकट किया हैं, प्रोसेसर्स एसोसिएशन से जुड़े कमल विजय तुलसियान ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया हैं। सूत्रों के अनुसार विभिन्न देशों से कुल 17 प्रतिशत फेब्रिक्स अंडर वेल्यु के तहत डम्प होता हैं, तिरुपुर एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2016-17  में 3994 करोड़ तथा वर्ष 17-18 में  4983 करोड़ का कपड़ा आयात हुआ है, ये उल्लेखनीय हैं कि फैब्रिक्स का आयात बढ़ने से विवर सबसे ज्यादा त्रस्त थे, जबकि ट्रेडरों स्वयं ने आयातित कपड़े के कन्टेनर के कन्टेनर मंगा कर अपने व्यवसाय की दिशा बदल दी, व मन मुताबिक मुनाफा कमाया, इम्पोर्ट बढ़ने से कोलकोता, मुम्बई, हैदराबाद, कोचीन, चेन्नई, बेंगलोर, यहां तक छोटे-छोटे शहरों के कोड व्यापारियों ने चीन आदि से कपडे के कन्टेनर के कन्टेनर मंगाने शुरू कर दिए। अब आयात ड्यूटी 10 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिए जाने से अलबत्ता सूरत का कपड़ा व्यवसाय फलेगा-फूलेगा तथा दुसरीं मंडियों में कपड़े के कन्टेनर आने कम हो जाएंगे।

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