विदेशी सोयातेल वायदा में मंदी, हाजिर भाव स्थिर

विदेशी सोयातेल वायदा में मंदी, हाजिर भाव स्थिर
खाद्यतेल मे अधिक तेजी के संयोग कम
 
हमारे संवाददाता
स्थानीय खाद्यतेल बाजार में हाजिर में खरीदी समर्थन कमजोर बताया जा रहा है । गत् हपते सोयाबीन 3450 से 3550 रु.  तक बढ़ा और सोयातेल 748 से 744 रु. तक नीचे  में घूमता रहा । विदेशी वायदा बाजार मलेशियन केऐलसीई और शिकागो में हल्के सुधार रहे जिससे खाद्यतेलो में गत् हप्ते अधिक तेजी नहीं बनी । म.प्र. में कही कही गत् हप्ते वर्षा वेग से हुई तो कही हलकी फव्वारे ही बने रहे । इंदौर - मालवा का इलाका कुछ इसी तरह का रहा । इंदौर कुल जमा वर्षा का आंकडा 15 इंच के अंदर ही रहा बताया गया है । हांलाकि कृषि लिहाज से वर्षा की उन्नती बेहतर बताई जा रही है । हाल-फिलहाल कृषि की पूर्ण बोउनी होकर कृषको को सुख-संपदा में ही दिखाई पड रही है । उनका मानना है कि इस वर्ष भी तिलहन फसल की पैदावार में कमी नहीं रहेगी । भारत में वायदे तेल-तिलहनो में गत् हप्ते तेजी का रुख रहा । तेजी के पीछे पामतेल के निर्यात में आई मामूली मांग से जानकार बताते है कि इस तेजी  के पीछे भारतीय आयातको का गणित आना बताया जा रहा है । देश में कई प्रकार के तिलहनों की पैदावार है । भारत के भूगोल में विभिन्नता होने से जातिय खाद्यतेल की खपत भी अलग अलग होती है । पूरा उत्तर भारत सरसो तेल का और मध्य भारत मूंगफल तेल का और दक्षिण भारत खोपरा तेल का खाने में उपयोग में लेता है । सोयाबीन के आने से भारत में इसकी खपत भी चहुंओर हुई है । अर्थात वेरायटी के खाद्यतेल उत्पादन भारत में हो रहे है तो खपत भी सभी की है । भारत में आयातित खाद्यतेल की भरमार और देशीय उत्पादन पर के इन समीकरणों से तेलों में और तेजी की स्थिति तो नही बनती है । व्यापारियों के अनुसार पामतेल और सोया रिफाइंड  तेल के भाव में ज्यादा अंतर नहीं रह जाने से खपत दोनों ही तेलों की लगभग बराबर रहने की संभावना है मगर जिन्हें जो स्वाद लगता है वही उपयोग में लेंगे  । उत्तर भारत के लोग दैनंदिनी और अचार खपत  में सरसों का तेल उपयोग में लेंगे न कि सोया और मूगंफली तेल । विशेषज्ञों का मानना है कि शुद्ध भारतीय उत्पादन और खपत में कुछ ही अंतर हो सकता है । इस खाई को पाटना तिलहन के कृषि रकबे बढ़ाकर की भी किया जा सकता है । कृषि के जानकार औाग्र भारतीय बुजुर्गो की माने तो प्रकृति द्वारा देय  देशीय जातीय के उत्पादन स्वास्थ को तंदरूस्त रखते थे । स्वासस्थ की दृषि से विदेशी जातीय के तेल-तिलहनों को अधिक आयात की निर्भरता को घाटाना भारत सरकार का देखना है । आलोच्य वर्ष में डीओसी के निर्यात में कोई बढौत्री नही थी उल्टे कम ही हुई थी । डीओसी की आड में सोयाबीन का स्टॉक वालो की देन है कि भाव में कुछ बढ़ोत्तरी हुईथ बताया जा रहा है । किसानो के पास कोई पुराना स्टॉक नहीं रहा गया था । किसान आने वाली फसल पर अपना ध्यान केंद्रत करने में लगे बताए गये है । सोयाबीन की आवकें भी 1500 बोरी और म.प्र. में 15000 बोरी बढ़ गई है।  
बहरहाल  गत् हप्ते इंदौर मूंगफली तेल गुरुवार को 830 से 845  रु., मुंबई मुगंफली तेल 860-870 रु., गुजरात लूज 840 से 845 रु. और राजकोट तेलिया 1360 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड 743  से  745 रु., इंदौर साल्वेंट 710 - 715 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 750.से 755 रु., मुंबई पाम 710 से 712 रु.,  और इंदौर पाम तेल 765 रु. के भाव रहे । इंदौर कपास्या 735 रु., और राजस्थान सरसों कच्चीघानी तेल 830 रु. के भाव रहे ।

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