बांग्लादेश से शुल्क मुक्त गार्म़ेंट्स का आयात जारी

बांग्लादेश से शुल्क मुक्त गार्म़ेंट्स का आयात जारी
76 टेक्सटाइल-एपरल आइटमों का आयात शुल्क दुगुना करने का असर सीमित
 
देवचंद छेडा
मुंबई। भारत सरकार द्वारा 76 टेक्सटाइल और एपरल आइटमों का आयात शुल्क 10% से बढ़ाकर 20% करने से स्थानीय उद्योग ने राहत की सांस ली है, लेकिन मुख्यत: बांग्लादेश से शुल्क मुक्त गार्म़ेंट्स की डम्पिंग चालू ही रहेगी। बांग्लादेश को बेसिक कस्टम डय़ूटी से पूर्ण मुक्ति होने से चाइनीज कपड़े का शुल्क मुक्त भारत में प्रवेश का प्रवेश द्वार बांग्लादेश है। `रूल्स आफ ओरीजीन' न होने से बांग्लादेश से शुल्क मुक्त आयात बढ़ा है। 2017-18 में बांग्लादेश से एपरल का आयात 44% बढ़कर 20.1 करोड़ डालर हुआ।
2005 में जब विश्व कोटा मुक्त बना तब भारत का एपरल का निर्यात 5 अरब डालर और बांग्लादेश का 3 अरब डालर था। इस समय भारत का एपरल का वार्षिक निर्यात 16.50 अरब डालर और बांग्लादेश का 32 अरब डालर हो गया है। वह भारत से रुई-सूत जैसी कच्ची सामग्री का आयात कर एपरल जैसे मूल्यवर्धित आइटम का निर्यात भारत को करता है।
एपरल एक्सपोर्ट प्रमोशन कासिल के भूतपूर्व अध्यक्ष और सीएमएआई के भूतपूर्व प्रमुख, प्रेमल उदानी ने कहा कि 2017-18 में भारत से एपरल निर्यात का लक्ष्य 20 अरब डालर था, लेकिन वास्तविक निर्यात मात्र 16.50 अरब डालर हुआ।
वर्ष 2018-19 में भारत का निर्यात मात्र 15.50 से 16 बिलियन डालर होगा। 2017-18 में भारत की टेक्सटाइल एपरल की निर्यात वृद्धि एक प्रतिशत से कम रही जबकि आयात वृद्धि 30% थी। भारत 30% रुई-सूत जैसी कच्ची सामग्री का आयात करता है। इससे इतना मूल्यसंवर्धन और रोजगार निर्माण भारत में कम होता है जबकि सिर्फ 3% कच्ची सामग्री का निर्यात करता है।
भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान को यूरोपीय देशों में शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा मिलती है। इससे 10% का फर्क पड़ जाता है। भारत और ईयू के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने और भारत को ईयू में शुल्क मुक्त निर्यात की सुविधा मिलने पर प्रथम वर्ष में ही ईयू में भारत का निर्यात 3 अरब डालर हो जाने की संभावना है।
बेसिक गार्म़ेंट में बांग्लादेश, विएतनाम, कम्बोडिया की स्पर्धा के सामने भारत खास निर्यात नहीं कर सकता। इससे भारत से मूल्यवर्धित गार्म़ेंट का अधिक निर्यात होता है। इसमें एम्ब्रायडरी, एसिडवाश, स्टोनवाश साथ के गार्म़ेंट, गार्म़ेंट डाइंग और एम्बेलिशमेंट सहित के गार्म़ेंट का अधिक निर्यात होता है।

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