सितंबर में बारिश कम होने का अंदेशा

सितंबर में बारिश कम होने का अंदेशा
अलनीनो का भारत पर जोखिम फिलहाल कम, आगामी महीने से बढ़ने की संभावना 
नई दिल्ली। मानसून समान रहने के बावजूद अभी तक जितनी बारिश हुई है उसे देखते हुए वर्षा की कमी बढ़ने की संभावना है। कुछ अंतरराष्ट्रीय मंडल दर्शाते है कि सितंबर में अलनीनो का दबाव व्यापक बनेगा। जिससे मानसून औसतन कमजोर होगा।
अप्रैल महीने से ही समुद्र के स्तर का तापमान निरंतर बढ़ रहा है। इसके बावजूद अलनीनो की सीमा की तुलना में वह नीचा है ऐसा आस्ट्रेलियन मानसून विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कुछ समय पहले कहा था।
प्रसांत महासागर का पानी गरम होकर अलनीनो के स्तर तक पहुंचने की प्रक्रिया संबंधी क्लाइमेट माडल की संख्या पांच हो गई है।
भारत के लिए यह समाचार अच्छा नहीं है। मानसून जून में शुरू होने से लेकर अब तक उसकी प्रगति काफी कमजोर रही है। अच्छी शुरुआत के बाद वह धीमी पड़ गई थी। मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि जुलाई-अगस्त में अलनीनो की स्थिति नहीं होगी लेकिन सितंबर में दिखाई देगी।
सर्वेक्षण किये गए 8 क्लाइमेट माडल में से एक में संकेत था कि आगामी महीनों में समुद्र का स्तर और गरम होगा।
भारतीय मौसम विभाग ने अलनीनो की समीक्षा करने के बाद कहा कि सितंबर महीने से अलनीनो की स्थिति चरणबद्ध ढंग से बढ़ेगी। अलनीनो के कारण नकारात्मक असर पड़ने पर शीतकालीन फसल पर विपरीत असर होगा।
केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनोमिस्ट मदनसवन विस ने कहा कि अलनीनो के कारण शीतकालीन फसल पर असर होगा। अलनीनो के कारण उत्तर-पूर्व के मानसून और उसके कारण रवि फसल की बोआई पर प्रतिकूल असर होगा।  

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