सिंथेटिक्स टेक्सटाइल का बढ़ेगा निर्यात

कपड़ा-परिधान : निर्यात लागत घटी
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हमारे प्रतिनिधि
मुंबई! नई दिल्ली । बढ़ते आयात की समस्या का सामना कर रहे सिंथेटिक टेक्सटाइल निर्माता सितंबर तिमाही के बाद हालात में सुधार के लिए रुपये में गिरावट पर बड़ा दांव लगा रहे है।
अधिकृत आंकड़ों के अनुसार, रेडीमेड गार्म़ेंट्स (आरएमजी) के आयात में 47 प्रतिशत की वृद्धि की हुई है। इसमें से हाथ से निर्मित फाइबर का मूल्य इस साल अप्रैल और जुलाई के बीच 7.846 करोड़ डालर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 5.352 करोड़ डालर था। हाथ से निर्मित स्टेपल फाइबर, फैब्रिक्स धागा और वस्तुओं का आयात जुलाई 2018 में समाप्त चार महीने की अवधि में 26 प्रतिशत बढ़कर 89.635 करोड़ डालर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 59.162 करोड़ डालर था।
कैलेंडर वर्ष 2017 के अंत में डालर की तुलना में 63.8 के आसपास स्थिर होने के बाद रुपया में गिरावट शुरू हो गई और मार्च 2018 के अंत तक यह गिरकर 65.2 पर आ गया। इसलिए सिंथेटिक टेक्सटाइल विनिर्माताओं को आने वाली तिमाहियों में उद्योग में सुधार की उम्मीद है क्योंकि तैयार परिधानों का आयात रुपये में गिरावट की वजह से धीमा बने रहने का अनुमान है।
घरेलू सिंथेटिक टेक्सटाइल निर्माताओं के लिए यह राहत की बात है। क्योंकि रुपया पिछले वर्ष के 63.9 के स्तर से इस कैलेन्डर वर्ष में अब तक 11 प्रतिशत गिरकर डालर की तुलना में 72 पर आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अप्रैल के बाद मिले निर्यात आर्डरों के खेप जाने लगेगी। इसलिए इसका प्रभाव आंशिक तौर पर सितंबर तिमाही और पूरी तरह दिसंबर तिमाही में दिखेगा। इस तरह से भारत का सिंथेटिक्स टेक्सटाइल निर्यात सितंबर तिमाही में मजबूत रह सकता है।
पिछले दिनों रुपए की एतिहासिक मंदी के चलते घरेलू सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान की निर्यात लागत अपेक्षाकृत काफी घट गई है।जिससे सिंथेटिक्स कपड़ा एवं परिधान का निर्यात आगे बढने की संभावना बन गई… है।जिससे सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के उद्योग व्यापार के क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनने के आसार नजर आ रहे है।जिससे कपड़ा-परिधान के क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे।ऐसे में देश में रोजगार बढाने को लेकर बेहद जरुरत है।जिसको लेकर केद्र सरकार को सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के निर्यात को बढावा देने को लेकर विशेष प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यता है।
दरअसल केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिनस्थ्य कार्यरत वाणिज्यक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएण्डएस) की तरफ से अपने ताजा अध्ययन में कहा गया है कि घरेलू सिंथेटिक्स कपड़ा एवं परिधान के निर्यात में 47 प्रतिशत तक तेजी का रुख बन गया है जो कि इस क्षेत्र को लेकर सकारात्मक रुख कहा जा सकता है।यद्यपि डॉलर की मजबूती से कच्चा माल अपेक्षाकृत महंगा हो रखा है।जिससे घरेलू सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के उद्योग पर पड़ा है।जिसको लेकर अग्रणी उद्यमियों की तरफ से सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान की कीमत में 4/5 प्रतिशत तक की बढोतरी की गई है।जिससे इन कपड़-परिधान के उद्यमियों को उत्पादन लागत की कमोबेश भरपाई हो रही है।ऐसे में आगे सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के निर्यात को बढावा मिलने पर आगे कपड़ा उद्योग के समक्ष सकारात्मक रुख बना रहेगा। जिससे सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान क्षेत्र को आधुनिकीकरण को लेकर बेहद सहायक सिद्व हो सकेगा।वैसे भी भारतीय निर्यातकों की तरफ से अगले क्रिशमश और नव वर्ष के दृष्टिगत सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के निर्यात को लेकर अभी से सुसज्य है और आगे अधिकाधिक वैश्विक ऑर्डर लेने को लेकर सुगबुगाहट तेज कर रखी है।जिसके तहत भारतीय निर्यातकों को कपड़ा-परिधान के निर्यात को लेकर कमोबेश ऑर्डर प्राप्त भी हो रहे है क्योंकि विदेशी खरीददारों को लेकर लगता है कि भारत से इस समय सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान का आयात करना काफी सस्ता पड़ेगा और बिल्कुल सटीक समय है।ऐसे में सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान को लेकर भारतीय निर्यातकों की तरफ से अभी से प्रयासरत हो गए है और निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुख बनने लगा है।जिसके तहत आगे कपड़ा-परिधान के निर्यात मोर्चे पर बढत कायम रहने के आसार स्पष्ट रुप से नजर आ रहे है।जिसे कपड़ा-परिधान कें क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे जो कि आज देश में इसकी काफी जरुरत महसूस हो रही है।
इसीबीच सिंथेटिक्स कपड़ा एवं परिधान के निर्यातकों की तरफ से केद्र सरकार से गुजारिश की जा रही है कि निर्यात को बढावा देने को लेकर निर्यात के मोर्चे पर प्रोत्साहन दिया जाए ताकि निर्यातकों को हाøसला अफजाई हो सकेगी।जिससे भारतीय निर्यातकों की तरफ से सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान के निर्यात को नई ऊंचाई पर पहुंचाने को लेकर विशेष रुप से अग्रसर हो सकेंगे। जिससे ही सही मायने में सिंथेटिक्स कपड़ा-परिधान निर्यात के क्षेत्र में सकारात्मक रुख बन पाएगा।जिसको लेकर अर्से से चाहत बनी हुई है। '

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