नई फसल खरीद नीति को मंजूरी

किसानों को एमएसपी से फसलों का दाम मिलना होगा सुनिश्चित
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार ने 12 सितम्बर 2018 को किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने को लेकर 15052 करोड़ रुपए की नई फसल खरीद नीति की घोषणा की गई।जिसके तहत राज्य सरकारों को एक मुआवजा स्कीम चुनने और खरीद को लेकर प्राइवेट एजेंसियों को शामिल करने की मंजूरी दी गई है।जिसको लेकर प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) नाम की इस नई नीति को पीएम की अगुवाई में हुई केद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।
इस बैठक में शामिल केद्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने कहा कि पीएम-आषा का लक्ष्य किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी कीमत दिलाना सुनिश्चित करना है जिसके बारे में 1028 के बजट में ऐलान किया गया था।यह एक ऐतिहासिक फैसला है।उन्होंने कहा कि पीएम-आशा के तहत राज्यों को कमोडिटी की कीमत उसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे जाने की स्थिति में तीन योजनाओं में एक को चुनने की आजादी होगी।यह योजनाएं हø प्राइस सपार्ट स्कीम (पीएसएस),हाल में बनी प्राइस डेफिशिसंसी पेमेंट स्कीम (पीडीपीएस) और पायलट ऑफ प्राइवेट प्रोक्योरमेंट स्टॉकिस्ट स्कीम (पीपीएसएस) है।जिसके तहत राज्य इनमें से किसी भी योजना के तहत कमोडिटी खरीद सकते है।कैबिनेट ने पीएम-आशा को लागू करने को लेकर अगले दो वित्त वर्ष़ों में 15053 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है।जिसमें से 6250 करोड़ रुपए इस वर्ष खर्च किए जाएंगे।इसके अतिरिक्त केद्र सरकार ने खरीद एजेंसियों को लेकर 16550 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सरकारी गारंटी दी है जिससे कुल गारंटी बढकर 45550 करोड़ रुपए की हो जाएगी।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि पीडीपीएस स्कीम मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना की तर्ज पर है बहरहाल यह सिर्फ तिलहन किसानों को लेकर सुरक्षा मुहैया कराएगी।
जबकि पीडीपीएस स्कीम के तहत सरकार किसानों को एमएसपी और थोक बाजार में तिलहन के मंथली एवरेज प्राइस के बीच के अंतर का भुगतान करेगी।यह योजना किसी राज्य में तिलहन के 25 प्रतिशत तक के उत्पादन पर लागू की जाएगी।

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