ग्रे के भाव में सामान्य उथल-पुथल

ग्रे के भाव में सामान्य उथल-पुथल
हमारे संवाददाता
औद्योगिक उत्पादन प्रक्रिया होलिका दहन के दो दिन पूर्व ही पूर्णत: अवरुद्ध हो गई है। श्रमिकों के अपने गृह ग्रामों को कूच करने के पश्चात औद्योगिक क्षेत्र के सभी चरणों में विरानी प्रसर गई है। रंगों की चहल-पहल, रंग-बिरंगे थानों की आवा-जाही, ग्रे पर रंगों की घटा, जीनरों व प्रोसेस हाऊसों में दृष्टिगत होती सतरंगी इद्रधनुषी सुषमा पूर्णत: विलीन हो गई है। सड़कों व अन्य स्थानों पर थिरकता पानी अदृश्य होकर औद्योगिक क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रूप में उभरता प्रतीत हो रहा है। लगभग दस दिनों के बाद ही, शीतला सप्तमी के पश्चात मजदूरों के लौटने से पुन: औद्योगिक क्रिया-कलापों में गति आ सकेगी। औद्योगिक क्षेत्र में अभिनय शान्ति का साम्राज्य छा गया है। अवकाश के इन दिनों में स्वत: बंदी का नजारा सर्वत्र परिलक्षित होने से रोज-मर्रा की हलचलों का अभाव खटकता है। आगे की सीजन को दृष्टिगत रखते हुए उद्यमी भले ही उत्पादन लेने के इच्छुक रहे, परंतु लेबर के न रुकने और उनके न होने से उत्पादकों को मनमसोस कर रहने को मजबूत होना पड़ता है।
प्रदूषण निराकरण व नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों को पालता में प्रदूषण मंडल प्रदूषित जल शोधन संयंत्र के पदाधिकारियों के साथ उद्यमी पूर जोर चेष्टा में लगे हुए है और लगता है नियत समयावधि में बोलतरा जसोल-बिठूजा व्यवस्थित रूप में आयेंगे। इससे उद्यमियों के साथ उनसे सम्बद्ध लोगों को भारी राहत का एहसास होगा। सूत्रों की माने तो उनका कहना है कि कुछ अनाधिकृत और अवांछित लोग निस्तारित प्रदूषित जल पाईप को इस प्रकार निष्क्रीय करने में सफल होते है ताकि उनका प्रदूषित पानी अनावश्यक बिखरे जल के साथ मिल जाए। इससे प्रथम दृष्टया प्रदूषण परिपूर्ण वातावरण उभर जाता है और उसके कुछ छाया चित्रों से यहां के औद्योगिक वातावरण को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है। वास्तविकता से भिज्ञ लोग जानते है कि स्थानीय वत्र रंगाई छपाई ने ही यहां समृद्धि - खुशहाली का बिगुल बजाया है। दूर-दराज के हजारों बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराया है। स्थानीय हर तबके के पास काम की मार है, समय नहीं है। छोटे स्तर पर प्रारंभ हुआ यहां का वत्र उद्योग आज इतनी दिक्कतों के पश्चात भी फलफूल रहा है। उत्पादक नवीनतम उत्पादनों के माध्यम से इस उद्योग को परिष्कृत करने में लगे हुए है। औद्योगिक संभावनाओं के संदर्भ में यहां विस्तार और विकास हो सकता है, अगर सरकार व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की पहल करें। ग्रे क्लोथ दूसरे राज्यों से आता है। उसके लूम यहां व्यवस्थित उत्पादन कर सकते है। यहां बिजली महंगी होने से लूम लग नहीं पा रहे है। 
सोलर ऐनर्जी के माध्यम से कुछ करने का सोचा जाय तो बहुत कुछ हो सकता है। प्रिन्ट नाईटी ने ख्याति अर्जित की है। पापलीन यहां की गुणवत्ता के कारण देशभर में मशहूर है। पेटीकोट उद्योग निरंतर निपुणता की ओर बढ़ रहा है। महिलाओं के खाली समय के उपयोग व अध्य अर्जन में भी इस उद्योग की भूमिका सराहनीय है।
ग्राहकी में कुछ बदलाव आया है। रेडी माल की मांग बढ़ी है। कतिपय कारणों से माल चालानी में विलम्ब हो रहा है। ग्रे भावों में सामान्य उथल-पथल के साथ स्थिर स्थिति बनी हुई है। ख्याति प्राप्त ब्रांड उत्पादकों के पास आंकड़ों के पास आफरों की कमी नहीं है। भुगतान भी इन दिनों ठीक आने की जानकारी है।
उद्यमियों का ध्यान लोकसभा चुनावों में कारण चुनावी चर्चाओं में है। यहां वैचारिक सुदृढ़ता के भिन्न पार्टियों के लोग भी बात सुनते है तथा अपने विचारों को स्पष्ट करते है। अप्रिल घटनाओं का अभाव यहां की आत्मीयता को उजागर करनेवाला है। व्यवस्था की जो कहानी लिखी जा रही है, उससे लगता है कि जो उद्यमी पलायन कर चुके है, वे भी पुन: कभी भी लौट सकते है। मार्च क्लोजिंग की सीजन का भार भी कम नहीं है। सभी खाता बंदी व लाभ-हानि का चिठ्ठा बना रिटर्न तैयार को अग्रसर है। सच पूछा जाय तो कई सुधारों के बाद भी आज का उद्यमी पेपर वर्क से जकड़ा हुआ जो छोटे उद्यमियों के लिये भारी सर-दर्द है।
पश्चिमी राजस्थान का यह क्षेत्र सुविधाओं से वंचित रह कर सदा पिछड़ा ही अभिचिन्हित होता रहा है। समय के साथ समृद्धि का बीज अंकुरित हुआ है। अपेक्षित प्रयासों के अभाव में दूर-दराज की रेल सेवाओं का लाभ बाड़मेर से अभी तक न किया जाना विचारणीय है। कई व्यवस्थाएं यहां से सहज में की जा सकती है।

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