कालीमिर्च के व्यापार में कदाचार घटा, लेकिन और सावधानी रखना जरूरी

कालीमिर्च के व्यापार में कदाचार घटा, लेकिन और सावधानी रखना जरूरी
किसानों की मदद के लिए कंसोर्सियम ऑफ ब्लैक पेपर ग्रोवर्स ऑर्गे. का सरकार से अनुरोध
हमारे प्रतिनिधि  
कोच्चि। कालीमिर्च का न्यूनतम आयात भाव (एमआईपी) का दुरुपयोग रोकने के लिए अभी और कदम की जरूरत होने की बात कंसोर्सियम आफ  ब्लैक पेपर ग्रोवर ऑर्गेनाइजेशन ने सरकार से की है। 
काली मिर्च की पैदावार करने वाले किसानों की मदद करने का अनुरोध करते हुए कंसोर्सियम के कोआर्डिनेटर विश्वनाथ के के ने कहा कि एमआईपी नोटिफिकेशन के कारण काली मिर्च के व्यापार में चल रहा कदाचार बड़े पैमाने पर नियंत्रण में आने के बावजूद कुछ आयातक अभी भी 100 प्रतिशत निर्यात आधारित इकाई या स्पेशल इकोनामिक जोन (एसईजेड) इस मिलते लाभ का दुरुपयोग कर रहे हैं।  
विश्वनाथ ने कहा कि विजिलेंस डिपार्टमेंट के प्रयासों से रु. 500 से अधिक मूल्य दर्शाने वाले काली मिर्च के आयात के बिलों में उल्लेखनीय कमी होने के बावजूद वियतनाम से होने वाले काली मिर्च के शुद्ध आयात में गत वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वियतनाम से यह आयात 'लाइट पेपर' नाम से भारतीय समुद्री सीमा तक पहुंचता है और वहां से वह भारत में प्रवेश करता है. इसके साथ 100 प्रतिशत निर्यात आधारित इकाइयों और एसईजेड द्वारा काली मिर्च के आयात में भारी वृद्धि हुई है।  
सरकार ने जिसमें 6% से कम वोलेटाइल आयल या पेपराइन कंटेंट हो, वैसे काली मिर्च के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वियतनाम की काली मिर्च इस बेंचमार्क का उल्लंघन करती है। श्रीलंका की काली मिर्च में सबसे अधिक आयल कंटेंट होने से उसके भाव में प्रीमियम बोला जाता है। 100% निर्यात आधारित इकाइयों द्वारा  सबसे कम आयल की मात्रा रखने वाली काली मिर्ची का बड़े पैमाने पर आयात हो रहा है। 
विश्वनाथ को आकार्य यह है कि वियतनाम की काली मिर्च में पाइपराइन कंटेंट 4 से 4.25 प्रतिशत से अधिक ना होने के बावजूद वह परीक्षण में किस तरह सफल होता है। वियतनाम की काली मिर्च  श्रीलंका की काली मिर्ची की तुलना में यहां आधे भाव पर बिकती है। आयात मुक्त तेल निकाल लेने के बाद काली मिर्च स्थानीय बाजार में प्रति किलोग्राम 30 से 40 के भाव पर बिक रही है जो लोगों के स्वास्थ्य के सामने गंभीर संकट पैदा करने के साथ भारत में काली मिर्च के किसानों के हितों को भी प्रभावित कर रही है। कदाचार रोकने की कार्यवाही डीआरआई को सौंपना जरूरी है। व्यापार में इस कदाचार के कारण कार्सिनोजेनिक मटेरियल प्रयुक्त 10000 टन काली मिर्च देश में आ रही है जो लोगों के स्वास्थ्य और घरेलू भाव को भारी नुकसान पहुंचा रही है। 
कंसोर्सियम द्वारा सरकार के विभिन्न विभागों में अनुरोध करने की बात बताते हुए विश्वनाथ ने कहा कि कस्टम्स विभाग ने नमूना लेकर उसका स्रोत गुप्त रखकर उसे मूल्यांकन के लिए स्पाइस बोर्ड को भेज देना चाहिए. इसके अलावा डीआरआई को कार्य सौंपने के लिए नियम में आवश्यक बदलाव करना चाहिए इससे कर चोरी बड़े पैमाने पर रुक सकेगी।  
विश्वनाथ ने कहा कि इतने कदम तत्काल न उठाए जाने पर काली मिर्च के घरेलू उत्पादक तथा काली मिर्च का व्यापार कालाबाजारियों के हाथ में जाता रहेगा।

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