कृषि क्षेत्र को संकट से उबारने को लेकर नाईक समिति ने सुझाए उपाय

कृषि लागत में कमी लाने व उपज के उचित मूल्य दिलाने का सुझाव 
 
रमाकांत चौधरी
जलवायु परिवर्तन की चुनौती,घटते प्राकृतिक संसाधनों,घटती जोत और उपज की उचित कीमत जैसी चुनौतियों से जूझ रही खेती को उबारने को लेकर राज्यपालों की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को साप दी है।इस समिति की सिफारिशों में खाद्य सुरक्षा,स्वास्थ्य सुरक्षा,ऊर्जा सुरक्षा,जल सुरक्षा और पर्यावरण सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।इस रिपोर्ट में घरेलू कृषि की हालत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरुरतों के हिसाब से सिफारिश की गई है।कृषि क्षेत्र की विभिन्न चुनौतियों की समीक्षा करने और उसे सुलझाने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट दी गई है।
दरअसल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट में कुल 21 सिफारिशें की गई है।जिसके तहत 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने को लेकर राष्ट्रपति ने राज्यपालों की उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था।
जिसमें हरियाणा, कर्नाटक,हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के राज्यपाल शामिल है। जिसको लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपनी रिपोर्ट सापने के बाद राज्यपाल नाईक ने कहा कि पर्यावरण के बदलते परिवेश में कृषि क्षेत्र की चुनौतियां गंभीर होने लगी है।जलवायु परिवर्तन से जहां फसलों की उत्पादकता में गिरावट की आसन्न चुनौती है वहीं घटती जोत से मुश्किलें बढ गई है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी को बढाने को लेकर कृषि की लागत में कमी लाने क कई उपाय सुझाए गए है, जिनमें उन्नत बीज, सिंचाई के आधुनिक तरीके, फसलों को जोखिम से बचाने को लेकर सस्ती फसल बीमा योजना जैसे प्रावधानों का विशेष उल्लेख किया गया है।इस समिति ने छोटी व मझौली जोत के किसानों के हित संरक्षण को लेकर उन्हें पर्याप्त वित्तीय मदद की सिफारिश की है।जिसके तहत केद्र व राज्य की हिस्सेदारी की 60-40 के अनुपात की जगह 90-10 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया है।जिसका सबसे अधिक फायदा उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा और उड़ीसा जैसे राज्यों को होगा।
जिसको लेकर केन्दीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की महत्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरंटी योजना को खेती से जोड़ने की सिफारिश भी की गई है।

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