उत्तर प्रदेश के किसान की गन्ना कीमत रु. 400 क्विंटल करने की मांग

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में पेराई कार्य के धीरे धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के किसानों ने 2018-19 मौसम में गन्ने की कीमत 25 प्रतिशत बढाकर 400 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की है।यह मांग ऐसे समय में की जा रही है जब निजी चीनी मिलों ने पिछले वर्ष 2017-18 मौसम में निर्धारित किए गए गन्ने (सामान्य किस्म) के मौजूदा कीमत प्रति क्विंटल 315 रुपए पर भुगतान करने में अपनी असमर्थता की बात दोहराई है।जिसको लेकर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनूप चंद पांडे की अध्यक्षता में गन्ने की कीमत निर्धारित करने को लेकर बैठक हुई थी। जिसमें किसानों के प्रतिनिधियों ने दृढता के साथ यह मांग की थी कि डीजल,उर्वरक और अन्य कृषि उत्पादन लागत में वृद्वि को ध्यान में रखते हुए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) संशोधित कर 400 रुपए करने की तात्काल आवश्यकता है। 
दरअसल इस उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेने वाले उत्तर प्रदेश के गन्ना समुदाय के प्रतिनिधियों की तरफ से कहा गया है कि केद्र और राज्य सरकारें किसानों की आमदनी दोगुनी करने के अपने कार्यक्रम पर तो जोर दे रही है बहरहाल हाल के वर्ष़ों में गन्ने की कीमत में मामूली बढोतरी की गई है।यद्यपि केद्र सरकार ने गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 275 रुपए प्रति क्विंटल तय कर दिया है बहरहाल परंपरागत रुप से उत्तर प्रदेश अपने किसानों को और लाभकारी मूल्य दिलाने को लेकर चीनी मिलों द्व्रा किए जाने वाले भुगतान की अधिक ऊंची घोषणा करता है।जिसके तहत चीनी मिलों ने नगदी प्रवाह की चुनौतियों के अपने दावों के समर्थन से बाजार में आधिक्य और चीनी से कम आमदनी के चलते घरेलू चीनी संकट का हवाला दिया है।जिसके तहत पिछले मौसम का पहले से ही ऊंचा गन्ना बकाया बना हुआ है।जिसको लेकर 2017-18 से संबंधित राज्य का गन्ना बकाया लगभग 78 अरब रुपया बैठता है।यद्यपि 75 निजी चीनी मिलों के बारे में कहा जाता है कि बकाया स्थिति को आसान करने को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा समर्थित किए जा रहे 40 अरब रुपए के आसान ऋण का सामूहिक रुप से लाभ उठाने को लेकर आवेदन किया है।  

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