शक्कर उद्योगों के मुकाबले गन्ना उत्पादकों को कमजोर राहत

शक्कर उद्योगों के मुकाबले गन्ना उत्पादकों को कमजोर राहत
शक्कर में मंदी की संभावना नहीं  
हमारे संवाददाता 
इंदौर। देश के सबसे बडे त्योहार समय में गत् हप्ते किराना थोक मंडी में सुस्ती रही वही खेरची व्यापार ख्बृ चला। खेरची किराना व्यापारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष आम जनता के बीच ही नही बडे व्यापार जगत के बीच भी पैसो को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नही थी जैसा कि पिछले साल बडे व्यापारियो उद्योगपतियों में थी। उनके अनुसार व्यापार चला और खूब चला। शहर का जायजा लेने पर पाया कि आम जनता की दीवाली भी अच्छी  रही। हालांकि महंगाई से किराना और दाल-दलहनों में कोई राहत नही थी। दैनंदिनी उपयोगों की वस्तुओं में दो पर राहते थी तो चार पर महंगाई असीम थी और अनुपात में महंगाई ही का अनुभव उन्हे हुआ। जनता के अनुसार इस वर्ष सट्टे में किराना घटको में जीरा, शक्कर, हल्दी, धनियां, राई, गरम मसाला घटक, नारियल, गोला और भी कई घटको पर गत् वर्ष के मुकाबले 70 से 100 प्रशित भाव में उंचे रह है। हालांकि दाले इस वर्ष राहत भरी थी। शक्कर उद्योगो को सरकार के भारी पेकेज, किसानो का गन्ना मूल्य राहत देने पर और इथेनाल उत्पादन के बढ़ाने के आदेश  मिलने से उन्हें भारी लाभ का संयोग आगे बनने लगेंगे ऐसा विष्लेषको का मानना है। शक्कर उत्पादन में वैसे भी उन्हे बाय-प्रोडक्ट के रूप में मोलेसेस से भारी मुनाफा होता था। करोड़ो टन शक्कर उत्पादन  के भी गत वर्ष के मुकाबले भाव लगभग 3 रु. प्रति किलो ऊंचे है। गत हप्ते थोक भाव शक्कर का 3300-3350 रु. था जो कि विगत् हप्तो के मुकाबले तेज था। खेरची में शक्कर का भाव 38 रु. से 45 रु. किलो तक होना बताया गया है। उधर कृषक जगत् का मानना है कि शक्कर उद्योगो के मुकाबले किसानों को कमजारे राहत रही है। सरकार द्वारा खाद्य पदार्थो पर एमएसपी योजनाओं के निर्णय से कई पदर्थ़ों के भाव आगे तेज हो सकते है। वर्तमान में काली मिर्च का भाव 375 से 450 रु. प्रति किलो है। एमएसपी के भाव 500 रु. प्रति किलो है। ऐसे और भी कई खाद्य पदार्थ  जिन पर भाव वर्तमान में एमएसपी से नीचे तो है लेकिन भविष्य मे ंउन पर तेजी संभाव्य है। अर्थात आगे महंगाई बढ़ने के संकेत है। गत हप्ते हांलाकि अधिकांश किराना जींस पर स्थिरता थी। नारियल का भाव अधिक भरावा रहने से नही बढ़ा था। गत् हप्ते भाव 250 भरती का 1800 रु. तक होना बताया गया है। हल्दी, जीरा, धनिया अपने उच्चतम भाव पर ही स्थिर रहे । भविष्य नीधि संघठन की पेंशन को लेकर दो नीति से 

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