कताई मिलो में कार्यरत कारीगरों व मजदूरों को नए रोजगार के अवसर होंगे सृजित

रमाकांत चौधरी''
नई दिल्ली । इस बाबत उत्तर प्रदेश के मेरठ,काशीपुर व हरियाणा के पानीपत की सिंघल स्पिनटैक्स प्राइवेट लिमिटेड एवं दिल्ली व मेरठ की लक्की टेक्स स्पिनर्स लिमिटेड के चेयरमैन श्री राम ऋwषि सिंघल ने एक टेलीफोन वार्ता में बताया कि उत्तर प्रदेश की योगी' सरकार की तरफ से कताई संघ द्वारा संचालित कताई मिलों को निजी क्षेत्रों में सापने का जो अहम फैसला किया गया है यह' सिर्फ कागजी खानापूर्ति मात्र है क्येंकि ये कताई मिलें लगभग दो दशक से बंद पड़ी है और मशीनों में जंग लग रखी है और यह मशीनें पूरी तरह से खराब हो चुकी है।जिससे स्वभाविक है कि निजी क्षेत्र कतई इस कताई मिलों में हाथ डालना नहीं चाहेगी।वैसे भी आजकल निजी उद्यमियों के समक्ष पूंजी की भारी कमी बनी हुई है।श्री सिंघल ने आगे बताया कि हम कताई संघ की कताई मिलों को पहले संचालित कर चुके है जिसको लेकर हमें कड़वा अनुभव भी प्राप्त है।ऐसे में आजकल जमाना काफी बदल गया है और कताई मिलों में अति आधुनिक मशीनों से उत्पादन प्रक्रिया संचालित की जाती है।ऐसे में हम उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से गुजारिश करते है कि कताई मिलों को बढावा देने को लेकर उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र घोषित किए जाएं जिसमें तमाम तरह की मूलभूत सुविधा उपलब्ध हो और टैक्सेशन के मामले में निजी उद्यमियों को सहूलियत देने का प्रावधान किया जाए।जिसके बाद ही उत्तर प्रदेश के निजी उद्यमी इन औद्योगिक क्षेत्र में अति आधुनिक मशीनें लगा सकेंगे और सुचारु पूर्वक उत्पादन प्रक्रिया को अंजाम दे सकेंगे।जिससे ही सही मायने में कताई मिलो में कार्यरत कारीगरों व मजदूरों को नए रोजगार के अवसर सृजित हो सकेंगे। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में 24 कताई मिलें है।

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