विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को बांटने हेतु सूरत की साड़ियों की जोरदार मांग

गणपत भंसाली
सूरत। चुनाव विधानसभाओं के हो या लोकसभा के, महिला मतदाताओं को अपने खेमे में लाने हेतु साड़ियां बांटना आम सा हो गया है, अब तो साड़ियां पार्टियों के चुनाव चिन्ह सहित तथा पार्टियों के झंडे के रंगों के अनुरूप ऑर्डर देकर बनवाई जाती है, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि चुनावी ऑर्डर के माल की आपूर्ति एडवांस पमेंट की शर्त से ही की जाती है या फिर स्थानीय ब्रोकर या आढ़तिया की गारंटी से माल भिजवाते है, प्राप्त सूचना के अनुसार लाखों साड़ियां 100 से 150 रु. प्रति नग की दर से मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान व तेलंगाना जैसे राज्यों में भेजी गई है, जबकि मिजोरम राज्य में साड़ियां नहीं भिजाई गई है, बाजार में चर्चा है कि लगभग 15 लाख साड़ियों की मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान व तेलंगाना में चालानी हुई है, पता चला है कि सर्वाधिक मात्रा में साड़ियां भाजपा व कांग्रेस जैसी बड़ी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं द्वारा महिला मतदाताओं को बांटने हेतु मंगाई गई है, कुछ मात्रा में बसपा पार्टी के नेताओं तथा समाजवादी पार्टी व गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं की ओर से भी ऑर्डर है, तेलंगाना में केसीआर की टीआरएस पार्टी की ओर से भी ऑर्डर मिले है, बताया जाता है कि लाभ पंचमी को प्रारंभ हुई कपड़ा प्रोसेसिंग इकाइयों को कारोबारी मंदी के दौर में इन राजनैतिक चुनावों की वजह से बड़ा ऑर्डर मिल गया, चूंकि ये साड़ियां राजनैतिक दलों द्वारा न मंगाकर नेता स्वयं ही मंगा रहे है, अतीत में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने भी महिला मतदाताओं को रिझाने हेतु साड़ियां व पुरुष वोटरों को धोती बांटी थी, अतीत में वर्तमान केंद्रीय नेता तथा भाजपा नेता श्रीमती स्मृति ईरानी ने भी अमेठी की महिलाओं को साड़ियां वितरित की थी, तेलंगाना में तो बुनकरों की बेरोजगारी दूर करने हेतु वर्ष 2017 में सभी जाति धर्म की महिलाओं को केसीआर की पार्टी टीआरएस द्वारा एक करोड़ साड़ियां राशन की दुकानों के माध्यम से नि:शुल्क वितरित की थी, यह योजना अगिनित बुनकरों द्वारा आत्महत्या कर लेने से उनके हितार्थ प्रारंभ की थी, लेकिन कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया था कि साड़ियां हैडलूम की नहीं होकर सस्ती कीमत की सूरत से मंगाई गई थी, साड़ियां वितरण करने के मामले में कई नेताओं की फेहरिस्त है, वर्ष 2004 में उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता लालजी टण्डन ने हजारों महिलाओं को अपने जन्म दिवस पर साड़ियां बांटी थी, उस साड़ी वितरण के दौरान जबरदस्त भगदड़ मच गई थी जिससे 21 महिलाओं की भगदड़ में मौत हो गई थी, इस मामले को लेकर लालजी टण्डन पर केस दर्ज किया गया था, जिसमें उनको क्लीन चिट मिल गई थी, अनेक राज्यों में चुनावों के समय महिला मतदाताओं को आकर्षित करने हेतु साड़ियां बांटी जाती रही है।

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