किसानों द्वारा माल रोक कर रखने से कपास की आवक धीमी

कोयंबतूर/बंग्लोर। किसानों द्वारा ऊंचे भाव की आशा में माल को रोककर रखने से कपास की आवक मंद पड़ गयी है। हालांकि मिलों के पास रुई का पर्याप्त स्टाक होने से मौसम की शुरुआत में देखी गई आय की कमी का इस पर विशेष असर नहीं है।
इस वर्ष 1 अक्टूबर से 28 नवंबर तक कपास की कुल आय 65.79 लाख गांठ (170 किलो की एक) थी, जो गत वर्ष की समान अवधि की 95.09 लाख गांठ की तुलना में 31 प्र.श. कम है। हालांकि अधिकांश मिलों के पास दो महीना चले इतना रुई का स्टाक पड़ा होने से मांग सामान्य ही रही।
यार्न में घट-बढ़ सीमित हो गयी है। संपूर्ण मूल्य श्रृंखला मंद दिखायी दे रही है। इसलिए मिल किसानों या व्यापारियों के पीछे नहीं दौड़ रही है, ऐसी जानकारी इंडियन टेक्सप्रीनर्स फेडरेशन (आईटीएस) के मंत्री प्रभुदामोदर ने दी।
वास्तव में मिल और मल्टीनेशनल ग्राहकों की खरीदी ठंडी रहने से आवक घटने के बावजूद भाव दबा है। `मिलों को ऊंचे भाव पर खरीदी में रुचि नहीं है, साथ ही साथ मल्टीनेशनल व्यापारी भी बाजार में सक्रिय नहीं है क्योंकि मौजूदा भाव उनके अनुकूल नहीं है, ऐसी जानकारी रायचूर के कमीशन एजेंट रामानुज दास बुवे ने दी।
रुई का भाव अक्टूबर के प्रारंभ में प्रति खंडी (356 किलो) 48000 रु. के आसपास था जो फिलहाल घटकर किस्मवार 44200 से 44800 रु. बोला जा रहा है। दिसंबर मध्य से आवक सुधरने की धारणा है।
महाराष्ट्र और गुजरात में कपास का भाव प्रति क्विंटल 5800-5860 रु. तक चल रहा है जबकि तेलंगाना में यह 5450 रु. समर्थन भाव के करीब है। काटन कार्पोरेशन ने तेलंगाना और उड़ीसा में खरीदी शुरू कर दी है।
उद्योग के सूत्रों को लगता है कि डालर का भाव 70 रु. के नीचे जाने से रुई के निर्यात संयोग फिलहाल धूमिल हø। इसके सामने मिलों ने रुई निर्यात के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया क्योंकि - देशी रुई की गुणवत्ता अच्छी है और भाव भी बाहर की तुलना में कम है। ऐसी जानकारी दी सदर्न इंडिया मिल्स `एसो.' के महामंत्री सेल्वा राजू ने
दी। मिलें आयात तो करेंगी लेकिन उन्हें अगस्त-सितंबर में सीजन समाप्त होने पर आवश्यकता पड़ेगी। इस वर्ष 15-20 लाख गांठ का आयात होने की धारणा है।

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