आयर्न ओर 15 प्रतिशत लुढ़का : आयात में 185 प्रतिशत का उछाल

आयात शुल्क केवल 2.5 प्रतिशत : स्टील मिलों को लाभ'
इब्राहिम पटेल
पिछले तीन सप्ताह में आयर्न ओर के भाव 15 प्रतिशत लुढ़के है और 2019 में भी बढ़ने के कोई उज्ज्वल चिन्हों नहीं दिखते। चीन के बेंचमार्क रिबार स्टील वायदा में मामूली सुधार आने से भाव गिरते रूककर बेर (मंदी का) करेक्शन आने से सप्ताह के अंत में थोड़ा सुधार आया है। 62 प्रतिशत स्टील कंटेंट के स्पोट भाव नवंबर के अंत में, 9 नवंबर की ऊंचाई 77.20 डॉलर प्रति टन से घटकर 65.95 डॉलर रहे हैं, जो बुधवार को एक ही चरण में 64.25 डॉलर मध्य जुलाई के बाद की बॉटम थी। भाव में मामूली सुधार की अभी भी जगह है।'
भारत और चीन जैसे देशों में आर्थिक विकास धीमा हुआ। अब मेनुफैक्चरिंग क्षेत्र धीमा हुआ है, क्रेडीट ग्रौथ नकारात्मक हुआ है, अगले महीनों में मौसमी सर्दियों की वजह से निर्माण प्रवृत्ति धीमी पड़ेगी। इससे मांग भी दबाव में रहेगी। इसके संकेत अभी से भी मिलने लगे है। यह घटना को वैश्विक आयर्न ओर बाजार में आई बिकवाली के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। इन सभी के सर्वांगी प्रभाव से स्टील के भाव दबाव में आ गए, नतीजतन स्टील मिलों का मुनाफा भी कम हुआ है। यदि भारत और चीन में क्रेडीट ग्रौथ अधिक धीमा होगा तो यह सायकल लंबे समय तक चलेगी।'
ऑस्ट्रेलिया से चीन में आयात होते हाई-ग्रेड ओर के ऊंचे भाव के कारण स्टील मिलों का मार्जिन सिकुडने से अब मिलें भी विदेश से और घरेलू खदानों में लॉ ग्रेड के ओर का आग्रह रखने लगी है। फोर्तेस्क्यू ग्रुप जो चीन के लिए नए मीडियम ग्रेड के आयर्न ओर को बाजार में रखने की ओर आगे बढ़ रही है, उनके लिए भी यह गलत वक्त है। शुक्रवार को चीन ने पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) जारी किया उससे पहले, मेक्यूरी कैपिटल जिसने 26 नवंबर को आयर्न ओर के भाव के बारे में बड़ा आशावाद जाहिर किया था। अब मेक्यूरी भी कहने लगी है की नए साल में भाव 65 से 75 डॉलर रहेंगे, उन्होंने 2019 की भाव औसत 64 डॉलर रखी है।'
मेक्यूरी का कहना है कि सर्दियों की मौसमी मांग गिरावट और ऐसी दूसरी घटनाएं अल्पावधि की होने से हाल में जो सेल ऑफ आया है वह स्टील और आयर्न ओर के भाव को प्रभावित किया है। इन सभी घटनाओं और अधिशेष स्टॉक लंबी अवधि में ऑफसेट हो जाएगा। मेक्यूरी तो ऐसा भी कहता है कि भाव दबाव में आए है, तब निवेशकों को ट्रेडिंग अवसर का लाभ भी लेना चाहिए। यह घटना हर साल घटती मौसमी घटना है और उपभोक्ताओं को 2019 के व्यापार के लिए सीजनल रि-स्टॉकिंग के लिए एंट्री पाइंट के रूप में वर्तमान घटना का लाभ लेना चाहिए। हम बाजार में सक्रिय होंगे तब तक, यह चरण पर बाजार किस ओर प्रयाण करता है, उसको ध्यान में रखने की भी जरूरत है।'
भारत में तो कर्नाटक और गोवा राज्य की खदानें बंद हुई है, तब आपूर्ति कमी के बारे में तर्क-वितर्क होने लगे हैं, उद्योग का कहना है कि माल की कमी पैदा हुई है, इसलिए भाव और आयात बढ़े है। भारत में आयर्न ओर पर की आयात शुल्क केवल 2.5 प्रतिशत जितनी नीची होने से स्टील मिलें उनका व्यापक लाभ उठा रही है। आयर्न ओर के उत्पादन की बात करते है तो कर्नाटक की सभी खदानों पर सालाना 300 लाख टन उत्पादन की सीमा सुप्रिम कोर्ट ने लागू करके रखी है, इतना ही नहीं वह इ-ऑक्शन द्वारा ही बिक्री कर सकते है। व्यापारियों के साथ खुल्लम-खुल्ला भाव निर्धारित करके माल बेचने पर भी अंकुश लगा दिए गए है। स्टील उद्योग द्वारा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से सितंबर के दौरान आयर्न ओर की आयात पिछले साल की समान अवधि से 183 प्रतिशत बढ़कर 79.7 लाख टन हुई है, जिसमें से 65 प्रतिशत आयात ऑस्ट्रेलिया से हुई थी।

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