पेथापुर के प्रिन्टिंग ब्लाक्स को मिला जीआई टैग

गुजरात की अनेक आइटमों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने का प्रयास'
क्रिश्ना शाह
गांधीनगर। विश्वभर में निर्यात होते पेथापुर प्रिन्टिंग ब्लाक्स को जीयोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई) टैग मिला है। विज्ञान और टेक्नोलाजी विभाग के सचिव धनंजय द्विवेदी ने कहा कि इस पहचान के कारण कारीगरों का उत्साह बढ़ेगा तथा परंपरागत कला को प्रोत्साहन मिलेगा। इसे लंदन के विक्टोरिया और आल्बर्ट म्युजियम में भी स्थान मिला है। गुजरात को अभी बहुत से अन्य जीआई टैग मिलने की संभावना है।
राज्य के विज्ञान और टेक्नोलाजी विभाग के अतिरिक्त सचिव सुभाष सोनी ने कहा कि इस ब्लाक्स का 1850 से अस्तित्व है। पहले इस परंपरा में 300 कारीगर थे लेकिन अब मात्र 20 कारीगर रहे है।
इस ब्लाक्स को नवंबर 2018 में जीआई टैग मिलने से गुजरात का यह 15वां जीआई टैग है।
गांधीनगर से 7 किलोमीटर के अंतर पर स्थित पेथापुर के निवासी वस्त्र पर प्रिन्टिंग के लिए लकड़ी का ब्लाक बनाने का कारोबार करते है तथा साग नामक लकड़ी का उपयोग करते है। जैतपुर, अहमदाबाद और मुंबई जैसे हांथ छापा काम के मुख्य केद्रों में भी पेथापुर के प्रिन्टिंग ब्लाक्स की भारी मांग है। गुजकोष्ट के प्रमुख डॉ. नरोत्तम साहू के अनुसार जीआई टैग निश्चित भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता तथा प्रतिष्ठा रखने वाले उत्पादन चिन्ह के रूप में उपयोग में लिया जाता है। जीआई टैग को उस क्षेत्र की बौद्धिक सम्पत्ति माना जाता है। जिसका उपयोग राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड प्रमोशन में मार्केटिंग व्यूह नीति के रूप में किया जा सकता है।'

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