बेमौसमी वर्षा व बर्फवारी से केसर की पैदावार प्रभावित

कश्मीरी केसर की उपज में 50% की भारी कमी की आश्ंाका'
हमारे संवाददाता द्वारा
नई दिल्ली । इस बार जलवायु परिवर्तन के चलते कश्मीरी केसर की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।जिससे जम्मू-कश्मीर में केसर की पैदावार रिकॉर्ड निचते स्तर पर पहुंचने की आशंका है।ऐसे में जम्मू कश्मीर के केसर उत्पादक किसानों का अनुमान है कि 2018-19 में केसर की उपज 50 प्रतिशत यानि दो टन के लगभग रह जाएगी।
दरअसल वित्तीय वर्ष 2012-13 के तहत जम्मू कश्मीर में केसर की कुल पैदावार रिकॉर्ड 17.56 टन के लगभग दर्ज की गई थी।यद्यपि तब से बेमौसमी बर्फबारी,मानसून की बरुखी और अन्य पर्यावणीय बदलावों के चलते केसर की पैदावार में भारी गिरावट आई है।2017-18 में तो यह घटरकर 4 टन के लगभग पहुंच गई।वैसे तो जम्मू कश्मीर में केसर की पैदावार बढाने को लेकर शुरुआत की गई मिशन सैफ्रन से हालत सुधरने की उम्मीद है।ऐसे में बेहतर गुणवत्ता के बीजों की आपूर्ति और सिंचाई सुविधाओं में सुधार आने वाले दानें में प्रति हेक्टेयर पांच से छह किलो केसर पैदा करना मुमकिन होगा।उल्लेखनीय है कि ईरान के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केसर उत्पादक देश है।जिसके तहत पिछले कुछ वर्ष़ों में जम्मू कश्मीर में केसर की खेती को लेकर इस्तेमाल भूमि का दायरा काफी सिकुड़ गया है।जिसके तहत 1990 के दशक में कश्मीर मूं 5800 हेक्टेयर भूमि में केसर की खेती होती थी।बहरहाल अब यह आंकड़ा घटकर 3800 हेक्टेयर पर रह गया है।जिसका मुख्य कारण बढता शहरीकरण है।वहीं पुरानी तकनीक पर निर्भरता भी केसर की पैदावार में कमी को लेकर मुख्य रुप से जिम्मेदार है।वैसे तो कश्मीर में फिलहाल प्रति हेक्टेयर में सिर्फ 1.25 से लेकर दो किलो कैसर पैदा होता है।वहीं दुनिया कमे अन्य हिस्सों में यह आंकड़ा 7 किलो प्रति हेक्टेयर के आसपास है। '

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