निजी चीनी मिलों की ऋण सुविधा 10 दिसम्बर तक बढ़ी

रमाकांत चौधरी'
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के किसानों को गन्ना बकाये का बोझ कम करने को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों को लेकर आसान ऋण सुविधा को 10 दिसम्बर 2018 तक बढा दिया गया है।इस समय उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों पर 2017-18 के गन्ना पेराई मौसम से संबंधित किसानों को लगभग 35 अरब रुपए की धनराशि बकाया है।यद्यपि 1.2 करोड़ टन चीनी उत्पादन की तुलना में कुल देय राशि अब 354 अरब रुपए से अिधिक हो गई है।जिससे उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के समक्ष आर्थिक कठिनाई बढ गई है।
दरअसल उत्तर प्रदेश की योग आदित्यनाथ सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों को प्रोत्साहन देने को लेकर 40 अरब रुपए के आसान ऋण की घोषणा की गई थी ताकि वह भुगतान की अपनी संकटग्रस्त स्थिति पर काबू पा सकेंगे।जिसको लेकर वाणिज्यक बैकों ने खुले बाजार में चीनी की खुदरा कीमतों में अत्यधिक कमी रही है।जिससे घरलू चीनी मिलों को नकारात्मक सूची में डाल दिया गया था।ऐसे में उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों की बैलेंस शीट और भुगतान के अनुपात के आधार पर इस योजना के तहत आवेदन करने को लेकर सख्त शर्त़ें लगा दी गई थी।जिससे उत्तर प्रदेश में चीनी क्षेत्र के अग्रणी बजाज,हिन्दुस्तान समूह,मोदी समूह,सिंभावली समूह जैसी बड़ी कंपनियां बेहद नाराज हो गई थी।चूंकि उत्तर प्रदेश की विभिन्न चीनी मिलों को लेकर सिर्फ 26 अरब रुपए मूल्य का आसान ऋण ही मंजूर किया गया है जिसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से बची हुई चीनी मिलों को लाभान्वित करने ने लेकर इस ऋण सुविधा में विस्तार करने का फैसला किया गया है।जिसको लेकर उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त श्री संजय भूसरेड्डी ने कहा कि हमने आसान ऋण सुविधा को 10 दिसम्बर 2018 तक का विस्तार दे दिया है ताकि प्रक्रिया के तहत आवेदकों को काम हो सकेगा।उन्होंने कहा कि यह ऋण 10 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि के ह जिसको लेकर इन्हें संबंधित बैंकों के बोर्ड द्वारा मंजूरी लेनी पड़ती है।उन्होंने कहा कि अब तक बैंक 26 अरब रुपए से अधिक के ऋणों को मंजूरी दे चुके है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से निजी मिलों को अतिरिक्त 4.50 रुपए प्रति क्विंटल की सब्सिडी मंजूरी प्रदान की है जो कि कुल मिलकर लगभग पांच अरब रुपए बैठेगी।जिसको लेकर चीनी मिलों के उद्यमियों की तरफ से कहा गया है कि 30 नवम्बर तक निजी मिलों पर 35 अरब से' अधिक धनरािशि बकाया था।वहीं इस समय देश भर में लगभग 60 अरब रुपए का गन्ना बकाया है।वैसे तो हाल ही में उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल की तरफ से चालू गन्ना पेराई मौसम को लेकर सामान्य किस्म वाले गन्ने की कीमत पिछले वर्ष के 315 रुपए प्रति क्विंटल पर ही यथावत् रखे गए है।यद्यपि डीजल,श्रमिक के पारश्रमिक,उर्वरक आदि कृषि लागत में वृद्वि को देखते हुए किसानों ने उत्तर प्रदेश सरकार से गन्ना की कीमत लगभग 400 रुपए प्रति क्विंटल करने की गुजारिश की थी।बहरहाल निजी चीनी मिलों की तरफ से चीनी की कम कीमत,निर्यात में लगातार मंदी से आर्थिक तंगी और विश्व बाजार में अधिकता के चलते गन्ना बकाया भुगतान करने में असमर्थता जतलाई गई।उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई कर रही है।जिसमें केद्र सरकार की तरफ से गन्ना उत्पादन करने वाले प्रत्येक राज्य को लेकर प्रत्येक वर्ष उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) की घोषणा के बावजूद गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) को लेकर चुनौती दी गई है।जिसको लेकर याची की तरफ से कहा गया है कि राज्य परामर्श मूल्य के पीछे कोई तर्क नहीं है कि इसे मनमाने ढंग से तय किया गया है।जिस पर आगे बहस होनी है। ''

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