इलेक्ट्रिक बाजार के अधिकांश व्यापारी जीएसटी से संतुष्ट

हालांकि, टैक्स, स्लैब में बारंबार संशोधन और रिफंड में विलंब से परेशान
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। जीएसटी के अमल के बाद उत्पादकों और ग्राहकों के बीच बाजार की चैन के सामान डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर्स तथा रिटेलर्स को विशेष परेशानी नहीं है जिससे अधिकांश व्यापारी वर्ग खुश है, ऐसी जानकारी इलेक्ट्रिक मर्चेन्ट एसो. (ईमा) की टैक्सेशन कमेटी के चेयरमैन योगेश धारिया ने दी।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) जुलाई 2017 से अमल में आने के बाद छोटे और मध्यम उत्पादक ही नहीं बड़े उद्यमी ही आयात निर्यात से परेशान होने की चर्चा उठी है।
इलेक्ट्रिक सामान के डीलर डिस्ट्रीब्यूटर तथा दुकानदार जीएसटी से खुश है। उत्पादक और ग्राहक के बीच चैनरूप व्यापारी वर्ग हर महीने पर्चेस और सेलिंग का औसत बड़े पैमाने पर कर लेते है और क्रेडिट-डेबिट बाकी रहा तो दूसरे महीने भी वह सेटल हो जाता है। जीएसटी के बाद व्यापार में वृद्धि हुई है और बाजार में तेजी आती जा रही है।
इमीटेशन ज्वेलरी मेन्युफैक्चरर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसो. के प्रमुख अतुल धनेशा ने बताया कि इमीटेशन ज्वेलरी मार्केट का कुल टर्नओवर 20 प्र.श. डाउन है लेकिन इसे मंदी नहीं कहा जा सकता।
इमीटेशन ज्वेलरी की विख्यात ब्रांड के एक एक्सपोर्टर के अनुसार भारत की इमीटेशन ज्वेलरी अफ्रिका, गल्फ और अमेरिका, युरोप में होती है लेकिन निर्यात में 20 प्र.श. की गिरावट हुई है। जिसका कारण यह है कि इसके पहले सरकार एक्सपोर्टर को पीतल का रिबेट प्रति किलो 140 रु. देती थी, जो अब घटाकर प्रति किलो मात्र 4 रु. कर दिया है। इसमें रिफंड अटक जाने से मेन्युफैक्चरर्स प्रोडक्शन कास्ट और निर्यात का निवेश चीन के सामान की तुलना में बढ़ गया है। इससे हमारी इमीटेशन ज्वेलर्स के निर्यात में कमी हुई है।

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